ट्रंप प्रशासन ईरान के खिलाफ जबर्दस्त दबाव की रणनीति पर कायम
वाशिंगटनः राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत के साथ ही ईरान के प्रति अपनी नीतियों को बेहद आक्रामक कर दिया है। 29 जनवरी 2026 तक की स्थिति के अनुसार, व्हाइट हाउस ने आधिकारिक रूप से मैक्सिमम प्रेशर 2.0 रणनीति को सक्रिय कर दिया है। ओवल ऑफिस से जारी अपने संबोधन में राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को सीधी चेतावनी देते हुए कहा कि तेहरान के लिए समय खत्म हो रहा है।
यह तीखी प्रतिक्रिया उन खुफिया रिपोर्टों के बाद आई है जिनमें दावा किया गया है कि जून 2025 में हुए अमेरिकी हमलों (ऑपरेशन मिडनाइट हैमर) के बावजूद ईरान ने अपने भूमिगत केंद्रों, विशेष रूप से फोर्डो और नतांज में यूरेनियम संवर्धन की गति फिर से तेज कर दी है। वाशिंगटन ने स्पष्ट कर दिया है कि परमाणु हथियार की दिशा में ईरान का कोई भी कदम एक ऐसी रेड लाइन है, जिसके पार सैन्य कार्रवाई ही एकमात्र विकल्प बचेगी।
इन नए प्रतिबंधों का स्वरूप पिछले वर्षों की तुलना में कहीं अधिक विनाशकारी है। अमेरिका का लक्ष्य ईरान के पेट्रोलियम निर्यात के उन छोरों को भी बंद करना है जो अब तक चीन और अन्य एशियाई देशों के माध्यम से शैडो बैंकिंग और घोस्ट टैंकरों के जरिए खुले हुए थे। अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने उन सभी विदेशी संस्थाओं और बैंकों की एक नई सूची जारी की है जो ईरान के साथ लेनदेन में मदद कर रहे हैं।
सबसे कड़ा कदम 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा है। ट्रंप प्रशासन ने चेतावनी दी है कि जो भी देश या कंपनी ईरान से व्यापार जारी रखेगी, उसे न केवल अमेरिकी बाजार से बाहर किया जाएगा, बल्कि उसके समस्त अमेरिकी उत्पादों पर भारी आयात शुल्क लगाया जाएगा। यह सीधे तौर पर उन देशों के लिए बड़ी चुनौती है जो ऊर्जा जरूरतों के लिए ईरान पर निर्भर हैं।
युद्ध की आहट अब खाड़ी क्षेत्र में साफ महसूस की जा रही है। अमेरिका ने अपने विशाल नौसैनिक बेड़े, जिसमें विमानवाहक पोत अब्राहम लिंकन और एक बड़ी अरमाडा शामिल है, को ओमान की खाड़ी और अरब सागर में तैनात कर दिया है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया कि यह बेड़ा वेनेजुएला भेजे गए बेड़े से भी बड़ा और खतरनाक है और किसी भी क्षण कार्रवाई के लिए तैयार है।
इसके जवाब में ईरान के सर्वोच्च नेता और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने घोषणा की है कि यदि उनके तेल टैंकरों या परमाणु केंद्रों पर हमला हुआ, तो वे होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह अवरुद्ध कर देंगे। यह क्षेत्र दुनिया के कुल तेल परिवहन का लगभग 20% संभालता है, और इसके बंद होने का मतलब वैश्विक अर्थव्यवस्था का ठप होना होगा।
इस घोषणा का तात्कालिक प्रभाव वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ा है। ब्रेंट क्रूड की कीमतों में कुछ ही घंटों के भीतर 3 फीसद से अधिक का उछाल आया, जिससे कई देशों में मुद्रास्फीति का डर बढ़ गया है। अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि यदि कूटनीतिक बातचीत (जो वर्तमान में तुर्की की मध्यस्थता से अंकारा में चल रही है) विफल होती है, तो तेल की कीमतें 150 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर सकती हैं। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि यह दबाव ईरान को एक नए परमाणु मुक्त समझौते की मेज पर लाने या उसके शासन को भीतर से कमजोर करने के लिए अनिवार्य है।