Breaking News in Hindi

गैर भाजपा शासित राज्यों को शीर्ष अदालत से मिला हथियार

केंद्रीय अधिकारियों पर राज्य कर सकते हैं मुकदमा

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि राज्यों के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो और अधिकार प्राप्त राज्य पुलिस कर्मियों को केंद्रीय सरकारी अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों में मुकदमा चलाने का पूरा अधिकार है। इसके लिए सीबीआई से किसी भी प्रकार की अनुमति या सहमति लेने की आवश्यकता नहीं है।

यह फैसला गैर-एनडीए शासित राज्यों के लिए राहत भरा माना जा रहा है, जो अक्सर केंद्र पर यह आरोप लगाते रहे हैं कि केंद्र सरकार ईडी और सीबीआई जैसी एजेंसियों का उपयोग करके उन्हें निशाना बनाती है। अब पश्चिम बंगाल में ईडी के खिलाफ दायर मामले तथा रांची में पुलिस की ईडी कार्यालय की जांच को भी कानूनी आधार मिल गये हैं।

न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने सोमवार को यह फैसला सुनाया, जिसका आधिकारिक आदेश मंगलवार को अपलोड किया गया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, यह निष्कर्ष कि राजस्थान राज्य के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के प्रावधानों के तहत आपराधिक मामला दर्ज करने का अधिकार है, भले ही आरोपी केंद्र सरकार का कर्मचारी हो, पूरी तरह सही है। हाईकोर्ट ने यह सही माना है कि यह कहना गलत है कि केवल सीबीआई ही ऐसा मुकदमा शुरू कर सकती है।

अदालत ने आगे स्पष्ट किया कि किसी विशेष कानून (जैसे दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम) की मौजूदगी मात्र से आपराधिक प्रक्रिया संहिता के संचालन को बाहर नहीं माना जा सकता। जब तक विशेष कानून स्पष्ट रूप से जांच के लिए अलग प्रावधान नहीं करता, तब तक सीआरपीसी की धारा 156 के सामान्य प्रावधान ही प्रभावी रहेंगे।

यह फैसला नवल किशोर मीणा की उस अपील को खारिज करते हुए आया, जिसमें उन्होंने राजस्थान हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी। मीणा का दावा था कि राज्य का भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो किसी केंद्रीय कर्मचारी पर मुकदमा नहीं चला सकता।

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम की व्याख्या करते हुए शीर्ष अदालत ने कहा कि पीसी एक्ट की धारा 17 के अनुसार, राज्य एजेंसी, केंद्रीय एजेंसी या कोई भी पुलिस एजेंसी (निश्चित रैंक के अधिकारी द्वारा) जांच कर सकती है। अदालत ने अंत में स्पष्ट किया, धारा 17 राज्य पुलिस या राज्य की किसी विशेष एजेंसी को केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ रिश्वतखोरी, भ्रष्टाचार और कदाचार के मामलों की जांच करने या मामला दर्ज करने से नहीं रोकती है।