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Yuvraj Death Case: 600 पन्नों की रिपोर्ट में खुलेगा मौत का राज, कई बड़े अफसरों पर गिर सकती है गाज

नोएडा के सेक्टर 150 में हुई इंजीनियर युवराज मौत केस में जांच के लिए गठित एसआईटी आज प्राइमरी रिपोर्ट सबमिट कर सकती है. एसआई की जांच लगभग पूरी हो गई है. एसआईटी ने 5 दिन लगभग 8 घंटे नोएडा ऑथोरिटी में बिताए. इस दौरान पुलिस कमिश्नर, डीएम, डीसीपी, एसीपी, सीएफओ सहित नोएडा ऑथोरिटी के ACEO, DGM सिविल ट्रैफिक सेल सहित नोएडा अथॉरिटी के तमाम अधिकारी मौजूद रहे.

सूत्रों के मुताबिक 600 से ज्यादा पन्नो की रिपोर्ट नोएडा ऑथोरिटी, पुलिस और डिजास्टर मैनेजमेंट की तरफ से SIT को जमा कराया गया है. SIT की रिपोर्ट के बाद कई अधिकारियों पर गाज गिर सकती है. ऑथोरिटी के संबंधित विभागों में कार्रवाई की आहट से हड़कंप मचा हुआ है. कल दोपहर 1:30 बजे से रात करीबन 9 बजे तक SIT की टीम ऑथोरिटी में रही. वहीं वही दोपहर लगभग 2:30 बजे से रात 9 बजे तक SIT ने चश्मदीद मोनिंदर से भी पूछताछ की.

पिता ने कहा- साहसी था बेटा, 2 घंटे तक लड़ा मौत से जंग

इंजीनियर युवराज मेहता की मौत की याद में आयोजित शोक सभा के बाद मृतक के पिता आज पहली बार कैमरे के सामने आए. उनकी आंखों में आंसू थे लेकिन आवाज में इंसाफ की एक तड़प थी. उन्होंने न केवल मीडिया और सरकार का शुक्रिया अदा किया बल्कि उस 2 घंटे की लापरवाही का काला चिट्ठा भी खोल कर रख दिया.

सिस्टम की लापरवाही ने छीन लिया बेटा

भावुक होकर पीड़ित पिता ने कहा कि सिस्टम की लापरवाही ने उसने उनका बेटा हमेशा के लिए छीन लिया. युवराज के पिता ने बताया कि उनका बेटा कायर नहीं था. जलजमाव वाले उस अंधेरे गड्ढे में गिरने के बाद भी युवराज ने मौत को 2 घंटे तक रोके रखा. वह संघर्ष करता रहा ताकि कोई आए और उसे बाहर निकाले, लेकिन सब एक दुसरे का मुह देखते रहे. अगर समय रहते कोई पानी मे कूद जाता या कोई सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होते तो मेरा बेटा आज जिंदा होता

युवरात के पिता ने की मुनेंद्र की तारीफ

शोक सभा मे उन्होने मृतक युवराज के पिता ने घटना के चश्मदीद और पानी मे कूदे मुनेंद्र की भी तारीफ की. उन्होंने कहा कि उस लड़के के अहसान को मैं जिंदगी भर नही भूल सकता. उसने अपनी जान की परवाह किए बगैर पानी मे छलांग लगाई और मेरे बेटे को बचाने की पूरी कोशिश की लेकिन संसाधनों की कमी के चलते वह भी मेरे बेटे को नहीं बचा पाया.

जांच रिपोर्ट पर सबकी नजर

अब सबकी नजरें SIT की उस 600 से ज्यादा पन्नों की रिपोर्ट पर है, जो यह तय करेगी कि युवराज के कातिल कौन हैं. वो गड्ढा वो बिल्डर या वो लापरवाह प्रशासन आखिर किसी लापरवाही है. एसआईटी की टीम ने अब तक 125 लोगो के बयान दर्ज किए है. घटना के चश्मदीद मुनेंद्र के भी बयान दर्ज किए गए हैं.