जापान में मध्यावधि चुनाव कराये जाने का रास्ता साफ
टोक्योः जापान की राजनीति में एक ऐतिहासिक घटनाक्रम के तहत, देश की पहली महिला प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने शुक्रवार, 23 जनवरी 2026 को संसद के निचले सदन (प्रतिनिधि सभा) को भंग कर दिया है। इस साहसी कदम के साथ ही जापान में 8 फरवरी 2026 को मध्यावधि चुनाव कराए जाने का रास्ता साफ हो गया है। प्रधानमंत्री ताकाइची ने यह फैसला अपने पद पर केवल तीन महीने बिताने के बाद लिया है, जिसका उद्देश्य अपनी नीतियों के लिए जनता से सीधा जनादेश प्राप्त करना है।
साने ताकाइची अक्टूबर 2025 में जापान की प्रधानमंत्री चुनी गई थीं। उन्होंने शिगेरु इशिबा का स्थान लिया, जिनकी सरकार बढ़ती महंगाई और पार्टी के भीतर घोटालों के कारण अलोकप्रिय हो गई थी। हालांकि ताकाइची स्वयं काफी लोकप्रिय हैं और युवाओं के बीच उनकी स्वीकार्यता लगभग 90 प्रतिशत तक देखी गई है, लेकिन उनकी पार्टी लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी अभी भी पिछले स्कैंडल्स की छाया से बाहर निकलने की कोशिश कर रही है।
वर्तमान में ताकाइची की सरकार एलडीपी और जापान इनोवेशन पार्टी के गठबंधन पर टिकी है, जिसके पास निचले सदन में बहुत कम बहुमत है। ताकाइची का मानना है कि एक मजबूत और स्पष्ट बहुमत के बिना रक्षा बजट में वृद्धि और आर्थिक सुधारों जैसे कड़े फैसले लेना मुश्किल होगा।
इस मध्यावधि चुनाव में तीन प्रमुख मुद्दे केंद्र में रहने की उम्मीद है। ताकाइची ने वादा किया है कि यदि वह दोबारा चुनी जाती हैं, तो वह खाद्य पदार्थों पर कंजम्पशन टैक्स (बिक्री कर) को दो साल के लिए निलंबित कर देंगी ताकि महंगाई से जूझ रहे परिवारों को राहत मिल सके। एक कट्टर रूढ़िवादी नेता के रूप में, ताकाइची सैन्य शक्ति बढ़ाने और चीन के प्रति सख्त रुख अपनाने की पक्षधर हैं। उन्होंने हाल ही में ताइवान के समर्थन में बयान दिए थे, जिससे बीजिंग के साथ तनाव बढ़ गया है।
आर्थिक बजट: विपक्ष ने प्रधानमंत्री की आलोचना की है कि उन्होंने 2026 के रिकॉर्ड 122.3 ट्रिलियन येन के बजट को पारित करने से पहले ही संसद भंग कर दी, जिससे देश की आर्थिक स्थिरता जोखिम में पड़ सकती है।
जापान में पिछले 60 वर्षों में यह पहली बार है जब किसी नियमित संसदीय सत्र के शुरू होते ही सदन को भंग किया गया हो। कड़ाके की ठंड और बर्फीले मौसम के बीच होने वाले इस चुनाव में मतदान प्रतिशत पर भी असर पड़ सकता है। विपक्ष ने सेंट्रिस्ट रिफॉर्म एलायंस बनाकर ताकाइची की राह मुश्किल करने की तैयारी की है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या जापान की जनता अपनी पहली महिला प्रधानमंत्री को एक मजबूत जनादेश देती है या देश में राजनीतिक अनिश्चितता का एक नया दौर शुरू होता है।