Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Lucknow Fire Tragedy: अलीगंज की बिल्डिंग में भीषण आग; एसी डक्ट से फैली लपटों ने ली 15 जिंदगियां Ujjain Gaya Kotha Tirth: उज्जैन के गयाकोठा तीर्थ का बदलेगा स्वरूप; विकास कार्यों के लिए मिले 6.7 करो... Madhya Pradesh News: ट्रांसफर नियमों का उल्लंघन? एमएसएमई और पीडब्ल्यूडी में वरिष्ठता को लेकर बढ़ा विव... Gwalior JAH Hospital News: जया आरोग्य अस्पताल में पार्किंग के नाम पर खुली लूट; खुद अस्पताल के डॉक्टर... Gwalior Coaching Fire Safety: ग्वालियर में कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा राम भरोसे; केवल 3 के पास फायर... MP UCC Draft: मध्य प्रदेश में 10 दिन में तैयार होगा समान नागरिक संहिता का ड्राफ्ट; जानें आदिवासियों ... Gwalior News: डीएलएड परीक्षा में फर्जी परीक्षार्थी का खुलासा; चाचा दे रहा था भतीजे की जगह परीक्षा, प... Terror Module Exposed: भोपाल एटीएस की बड़ी कार्रवाई; 'लोन वुल्फ' मॉड्यूल तैयार करने वाले सरगना की रिम... Mephedrone Drugs Network: भोपाल में ड्रग्स बनाने वाले सिंडिकेट का भंडाफोड़; हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी ... Seoni Jumbo Sitaphal GI Tag: सिवनी के सीताफल को मिला GI टैग; अब दुनिया भर में बिखेरेगा अपने स्वाद का...

चारों शंकराचार्य उन्नीस साल बाद एकजुट हुए

प्रयागराज के अपमान के बाद जाग रहा है हिंदू समाज

  • अविमुक्तेश्वरानंद विवाद पर फंस गयी भाजपा

  • योगी के बयान से साफ हो गया कारण भी

  • भाजपा और उसके संगठनों की परेशानी

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः धार्मिक और आध्यात्मिक जगत से एक अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक घटनाक्रम सामने आ रहा है। ज्योतिषपीठ के श्यामी अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर जारी विवादों के बीच, भारत की चारों पीठों के शंकराचार्यों के एक ही मंच पर आने की संभावनाएं प्रबल हो गई हैं। यदि सब कुछ योजना के अनुसार रहा, तो 10 मार्च 2026 को देश की राजधानी दिल्ली में सनातन धर्म का एक अभूतपूर्व दृश्य देखने को मिलेगा।

इस ऐतिहासिक मिलन का मुख्य केंद्र गो माता राष्ट्र माता अभियान है। दिल्ली में आयोजित होने वाले इस बड़े आंदोलन का उद्देश्य गाय को राष्ट्र माता का दर्जा दिलाना और उनकी सुरक्षा के लिए कड़े कानून की मांग करना है। इस अभियान के मंच पर चारों पीठों के जगद्गुरु शंकराचार्यों को एक साथ लाने की तैयारियां जोरों पर हैं।

आध्यात्मिक दृष्टि से यह मिलन इसलिए भी विशेष है क्योंकि पुरी पीठ के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती गो रक्षा के संकल्प हेतु पहले से ही अपने सिंहासन और राजछत्र का त्याग कर चुके हैं। दूसरी तरफ योगी आदित्यनाथ ने परोक्ष तौर पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को कालनेमी करार देकर यह साफ कर दिया है कि प्रयागराज में जो कुछ भी हुआ, उसमें उनकी सहमति थी।

पिछले कुछ समय से स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की पदवी को लेकर कुछ हलकों में जो असली-नकली का विवाद चल रहा था, वह इस आयोजन से शांत हो सकता है। अविमुक्तेश्वरानंद को पहले से ही दो पीठों का समर्थन प्राप्त है। अब पुरी पीठ के शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती के हालिया रुख ने सबको चौंकाया है। माघ मेला क्षेत्र में उन्होंने अविमुक्तेश्वरानंद को अपना लाडला कहकर संबोधित किया, जिसे एक स्पष्ट मौन स्वीकृति माना जा रहा है। यदि चारों शंकराचार्य दिल्ली के मंच पर एक साथ बैठते हैं, तो यह स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की पीठ पर सर्वसम्मति की मुहर लगा देगा।

सनातन परंपरा के इतिहास में ऐसा बहुत कम हुआ है जब चारों शीर्ष गुरु एक मंच पर आए हों। यदि 10 मार्च का यह आयोजन सफल रहता है, तो यह इतिहास में केवल तीसरा अवसर होगा। इससे पहले 1779 में श्रृंगेरी में आयोजित पहला चतुष्पीठ सम्मेलन में सभी एक साथ आये थे। 19 मई 2007 को बेंगलुरु में रामसेतु की रक्षा के मुद्दे पर चारों शंकराचार्य एक साथ आए थे।  दिल्ली का गो रक्षा आंदोलन, जो करीब 19 साल बाद इस दृश्य को दोहराएगा।

यह आयोजन केवल एक आंदोलन नहीं, बल्कि हिंदू धर्म की एकता का प्रतीक बनेगा। गो रक्षा जैसे संवेदनशील और आस्था से जुड़े विषय पर चारों पीठों का एकजुट होना केंद्र सरकार पर भी नीतिगत दबाव बना सकता है। संतों का यह महाकुंभ न केवल धार्मिक इतिहास का स्वर्णिम अध्याय होगा, बल्कि इससे सनातन परंपरा के भीतर चल रहे आपसी मतभेदों के भी समाप्त होने की उम्मीद है। दूसरी तरफ इस एकजुटता के एलान से अब हिंदू का ठेका लेने वाले संगठन और भाजपा पहली बार अपने वोट बैंक के भीतर से बड़ी चुनौती का सामना करने जा रहे हैं।