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सुपरफूड के रूप में उभरा बैम्बू शूट्स

वैज्ञानिकों ने सेहत के लिए वरदान का विकल्प खोजा

  • इसमें है पोषक तत्वों का खजाना

  • हृदय और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य में सुधार

  • सुरक्षा संबंधी चेतावनी भी जारी की गयी

राष्ट्रीय खबर

रांचीः वैज्ञानिक अब बांस को एक शक्तिशाली नए सुपरफूड के रूप में देख रहे हैं। हाल ही में हुए एक व्यापक शैक्षणिक शोध में यह सामने आया है कि भोजन के रूप में बांस का सेवन स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी हो सकता है। शोधकर्ताओं ने पाया है कि बांस का सेवन ब्लड शुगर को नियंत्रित करने, शरीर की सूजन को कम करने, पाचन स्वास्थ्य को बेहतर बनाने और एंटीऑक्सीडेंट प्रभाव प्रदान करने में सहायक हो सकता है।

बांस को दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ने वाले पौधे के रूप में जाना जाता है, जिसकी कुछ प्रजातियां एक ही दिन में 90 सेमी तक बढ़ सकती हैं। वर्तमान में चीन और भारत बांस के सबसे बड़े उत्पादक हैं, और एशियाई व्यंजनों में बैम्बू शूट्स (बांस की कोपलों) का उपयोग सदियों से होता आ रहा है। हालांकि, इंग्लैंड की एंग्लिया रस्किन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए इस पहले अकादमिक विश्लेषण से पता चलता है कि बांस भविष्य में वैश्विक आहार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है।

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https://youtu.be/bDegO0ZgvzM

बांस की कोपलों का पोषण प्रोफाइल काफी मजबूत है। इनमें प्रोटीन प्रचुर मात्रा में होता है, वसा बहुत कम होती है और फाइबर (रेशा) पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है। इसके अलावा, बांस में आवश्यक अमीनो एसिड, सेलेनियम और पोटेशियम जैसे खनिज और थियामिन, नियासिन, विटामिन ए, बी6 और ई जैसे विटामिन भी मौजूद होते हैं।

शोध के अनुसार, बांस की कोपलों के सेवन से मेटाबॉलिक स्वास्थ्य में सुधार होता है। मानव परीक्षणों में बेहतर ग्लाइसेमिक कंट्रोल देखा गया है, जो मधुमेह (डायबिटीज) के प्रबंधन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। साथ ही, लिपिड प्रोफाइल में सुधार के संकेत भी मिले हैं, जिससे हृदय रोगों का खतरा कम हो सकता है।

बांस में सेल्युलोज और लिग्निन जैसे फाइबर होते हैं जो आंतों की कार्यप्रणाली को सुचारू बनाते हैं। शोध में यह भी पाया गया कि बांस के यौगिक भोजन को भूनते या तलते समय बनने वाले हानिकारक रसायनों (जैसे एक्रिलामाइड) के उत्पादन को कम कर सकते हैं। यह पके हुए भोजन को अधिक सुरक्षित बनाने की क्षमता रखता है।

लाभों के बावजूद, शोधकर्ताओं ने सुरक्षा संबंधी चेतावनी भी दी है। बांस की कुछ प्रजातियों में ऐसे तत्व होते हैं जो कच्चे सेवन पर सायनाइड (जहर) छोड़ सकते हैं। साथ ही, कुछ यौगिक थायराइड ग्रंथि को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि, खाने से पहले कोपलों को अच्छी तरह उबालने से इन खतरों को पूरी तरह समाप्त किया जा सकता है।

एंग्लिया रस्किन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर ली स्मिथ का कहना है कि बांस में आधुनिक स्वास्थ्य चुनौतियों जैसे मधुमेह और हृदय रोग से लड़ने की अपार क्षमता है। हालांकि, इसे वैश्विक स्तर पर पूरी तरह अपनाने से पहले और अधिक उच्च-स्तरीय मानव परीक्षणों की आवश्यकता है।

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