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भाजपा को पहली बार हिंदु समाज से मिल रही चुनौती

शंकराचार्य प्रकरण पर प्रशासन की पत्र से विवाद

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः आम तौर पर भाजपा को कभी भी हिंदू समाज के मुखर विरोध का सामना इससे पहले नहीं करना पड़ा था। यह पहला अवसर है जब आम लोग भी शंकराचार्य के अपमान पर खुलकर सामने आ गये हैं और इसकी वजह से भाजपा की परेशानी बढ़ती नजर आ रही है।

दरअसल प्रयागराज मेला प्राधिकरण द्वारा बद्रीनाथ के ज्योतिष पीठ के प्रमुख स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को शंकराचार्य उपाधि के उपयोग को लेकर नोटिस दिए जाने के बाद विवाद गहरा गया है। बुधवार को धार्मिक नेता ने आठ पन्नों का जवाब भेजकर प्रशासन से नोटिस वापस लेने की मांग की है, अन्यथा कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है।

विवाद की जड़ 18 जनवरी को मौनी अमावस्या के पावन स्नान के दौरान पड़ी। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने रथ के साथ त्रिवेणी संगम पर स्नान के लिए जाना चाहते थे। हालांकि, प्रशासन ने भीड़ के दबाव का हवाला देते हुए वीआईपी आवाजाही पर रोक लगा दी थी। पुलिस और स्वामी के समर्थकों के बीच तीखी बहस हुई, जिसके बाद स्वामी ने वहीं धरना शुरू कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके अनुयायियों के साथ मारपीट की और उनका अपमान किया।

जब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इसे शंकराचार्य का अपमान बताया, तो मेला प्रशासन ने जवाबी कार्रवाई करते हुए उन्हें नोटिस थमा दिया। प्रशासन ने सवाल उठाया कि जब यह मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, तो वे इस उपाधि का उपयोग कैसे कर रहे हैं।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के वकील अंजनी कुमार मिश्रा ने अपने जवाब में कहा कि शीर्ष अदालत ने उनके मुवक्किल को यह उपाधि धारण करने से नहीं रोका है। उन्होंने तर्क दिया कि प्रशासन के नोटिस से स्वामी की प्रतिष्ठा और सामाजिक सम्मान को गंभीर ठेस पहुँची है। उन्होंने मांग की कि प्रशासन इस अपमानजनक नोटिस को तुरंत वापस ले।

इस मुद्दे पर उत्तर प्रदेश की राजनीति भी गरमा गई है। अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर कोई अधिकारी शंकराचार्य से उनकी उपाधि का प्रमाण पत्र मांगता है, तो यह सनातन धर्म का सबसे बड़ा अपमान है। उन्होंने मुख्यमंत्री से माफी की मांग की। कांग्रेस के पवन खेड़ा ने शाही स्नान की परंपरा को बाधित करने का आरोप लगाया और इसे सदियों पुरानी परंपरा का अपमान बताया।

वहीं, संत समाज में इसे लेकर अलग-अलग राय है। जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कहा कि मुख्य स्नान के दिनों में सभी संतों को पैदल चलना चाहिए ताकि श्रद्धालुओं को परेशानी न हो। उन्होंने आरोप लगाया कि स्वामी ने स्वयं नियमों का उल्लंघन किया है। दूसरी ओर, शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती ने पुलिस द्वारा संतों की पिटाई को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है।

इस घटना को जायज ठहराने के लिए भी अनेक भाजपा समर्थक सोशल मीडिया पर सक्रिय हुए थे तो इसके बाद आम समाज के अनेक लोग भी शंकराचार्य के अपमान के मुद्दे पर आगे आ गये। जिसकी वजह से अब सोशल मीडिया पर यह विवाद वायरल हो गया है।