चीन से निकटता के बाद अब अमेरिका पर बढ़ता अविश्वास
ओटावाः इतिहास में पहली बार कनाडा ने अपनी राष्ट्रीय रक्षा और सुरक्षा नीति में एक ऐसा अभूतपूर्व और चौंकाने वाला बदलाव शुरू किया है, जिसने वैश्विक कूटनीतिक हलकों में खलबली मचा दी है। पिछले 8 घंटों के भीतर ओटावा से प्राप्त रक्षा विभाग की आधिकारिक रिपोर्टों के अनुसार, कनाडाई सरकार ने एक व्यापक संभावित खतरा मूल्यांकन प्रक्रिया शुरू की है।
इस रणनीतिक समीक्षा का सबसे हैरान करने वाला पहलू यह है कि इसका प्राथमिक केंद्र कनाडा का दक्षिणी पड़ोसी और उसका सबसे पुराना सहयोगी, संयुक्त राज्य अमेरिका है। पिछले 100 से अधिक वर्षों के इतिहास में यह पहली बार है कि ओटावा ने वाशिंगटन को एक विश्वसनीय सहयोगी के बजाय एक ‘संभावित रणनीतिक चुनौती’ या जोखिम के रूप में वर्गीकृत किया है।
यह कठोर कदम डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की उन हालिया चेतावनियों और धमकियों के सीधे परिणाम के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें उन्होंने कनाडा से आने वाले उत्पादों पर भारी टैरिफ लगाने और सीमा सुरक्षा को लेकर अत्यंत कड़ा रुख अपनाने की बात कही थी।
ट्रंप ने बार-बार दावा किया है कि कनाडा के साथ व्यापारिक समझौते अमेरिका के लिए नुकसानदेह हैं और कनाडाई सीमा से होने वाला प्रवासन अमेरिकी सुरक्षा के लिए खतरा है। इन बयानों ने कनाडा के नेतृत्व को गहरे रक्षात्मक मोड में डाल दिया है।
कनाडा को अब यह वास्तविक डर सता रहा है कि अमेरिका की नई व्यापारिक नीतियां और उसकी संप्रभुता से जुड़ी कठोर मांगें न केवल कनाडाई अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ सकती हैं, बल्कि उसकी राष्ट्रीय स्वायत्तता को भी गंभीर नुकसान पहुँचा सकती हैं। कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने एक उच्च-स्तरीय गुप्त बैठक में अपने मंत्रियों और सैन्य अधिकारियों से स्पष्ट रूप से कहा है कि अब वह समय आ गया है जब हमें हर परिस्थिति, चाहे वह कितनी भी अप्रत्याशित क्यों न हो, के लिए तैयार रहना होगा।
इस सैन्य और रणनीतिक समीक्षा का दायरा काफी विस्तृत है। इसमें केवल पारंपरिक युद्ध की संभावनाओं का ही विश्लेषण नहीं किया जा रहा है, बल्कि हाइब्रिड खतरों पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है। इसमें व्यापारिक नाकेबंदी, जो कनाडाई आपूर्ति श्रृंखला को पंगु बना सकती है, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर संभावित साइबर हमले और सीमा पर अचानक बढ़ने वाले प्रवासन संकट जैसे मुद्दों को गहराई से शामिल किया गया है। कनाडा के रक्षा विशेषज्ञ अब इस बात पर विचार कर रहे हैं कि यदि अमेरिका अपनी सीमाओं को पूरी तरह सील कर देता है या आर्थिक प्रतिबंध लगाता है, तो कनाडा अपनी संप्रभुता की रक्षा कैसे करेगा।
परिणामस्वरूप, कनाडा अब अपनी दशकों पुरानी रक्षा नीति को बदलते हुए अमेरिका पर अपनी निर्भरता को न्यूनतम करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है। ओटावा अब अपनी रक्षा जरूरतों के लिए यूरोपीय सहयोगियों, विशेष रूप से यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस और जर्मनी के साथ सैन्य संबंधों को नए सिरे से मजबूत करने पर विचार कर रहा है।
इसके अलावा, कनाडा इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भी नए सुरक्षा भागीदारों की तलाश कर रहा है ताकि वह उत्तरी अमेरिका के भीतर अलग-थलग न पड़ जाए। यह पूरी स्थिति उत्तरी अमेरिका के सबसे पुराने, सबसे स्थिर और सबसे भरोसेमंद गठबंधन के बीच बढ़ती अविश्वास की एक ऐसी गहरी खाई को दर्शाती है, जिसे पाटना आने वाले समय में बेहद कठिन होगा। यह बदलाव न केवल इन दो देशों के संबंधों को प्रभावित करेगा, बल्कि पूरे नाटो और पश्चिमी सुरक्षा ढांचे की नींव को भी हिला कर रख सकता है।