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रूसी सेना का फिर से ऊर्जा नेटवर्क पर सटीक मिसाइल हमला

कीव में संसद और शहर में ब्लैकआउट

कीवः रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष ने जनवरी 2026 के भीषण शीतकालीन दौर में एक ऐसी विनाशकारी स्थिति अख्तियार कर ली है, जिसकी कल्पना आधुनिक युग में कठिन थी। पिछले 8 घंटों के भीतर प्राप्त हुई युद्धभूमि की विस्तृत रिपोर्टें इस बात की पुष्टि करती हैं कि रूसी सेना ने अपनी रणनीति बदलते हुए अब यूक्रेन के ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर अब तक का सबसे व्यापक और सटीक मिसाइल हमला किया है। यह हमला केवल सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका प्राथमिक लक्ष्य यूक्रेन की नागरिक सुविधाओं को ध्वस्त करना और सरकार के कामकाज को पूरी तरह ठप करना था।

इस हमले का सबसे प्रतीकात्मक और गंभीर प्रभाव यूक्रेन की राजधानी कीव में महसूस किया गया है। यहाँ देश की विधायी शक्ति का केंद्र, वेरखोव्ना राडा (यूक्रेन की संसद), वर्तमान में पूरी तरह से अंधकार में डूबी हुई है। संसद भवन में बिजली की आपूर्ति कटने का अर्थ केवल बत्तियाँ बुझना नहीं है, बल्कि इसके साथ ही वहाँ की संचार व्यवस्था, सुरक्षा प्रणालियाँ और सबसे महत्वपूर्ण—पानी की आपूर्ति एवं केंद्रीय तापन प्रणाली पूरी तरह ठप हो गई हैं।

कीव की हाड़ कंपाने वाली ठंड में, जहाँ वर्तमान तापमान शून्य से 15 डिग्री नीचे जा चुका है, हीटिंग का न होना किसी मृत्युदंड से कम नहीं है।रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि रूस का यह कदम महज एक संयोग नहीं, बल्कि यूक्रेन की प्रशासनिक मशीनरी को मनोवैज्ञानिक और भौतिक रूप से पंगु बनाने की एक गहरी साजिश है।

कीव के मेयर विटाली क्लिट्स्को ने आधिकारिक बयान जारी कर पुष्टि की है कि इस ताज़ा हमले के बाद शहर का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा पूर्णतः ब्लैकआउट की स्थिति में है। शहर के लाखों नागरिक इस समय बिना बिजली और ऊष्मा के रहने को मजबूर हैं। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि अगले 24 घंटों के भीतर बिजली बहाल नहीं की गई, तो जल आपूर्ति की पाइपलाइनें ठंड के कारण जम जाएंगी और उनके फटने का खतरा बढ़ जाएगा।

यदि ऐसा हुआ, तो युद्ध समाप्त होने के बाद भी शहर के बुनियादी ढांचे को ठीक करने में कई साल लग सकते हैं।मानवीय दृष्टिकोण से यह स्थिति अत्यंत भयावह होती जा रही है। अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और कई वैश्विक नेताओं ने रूस की इस कार्रवाई को शीतकालीन युद्ध अपराध की संज्ञा दी है।

उनका तर्क है कि जब आप युद्ध के हथियार के रूप में कड़ाके की ठंड का उपयोग करते हैं और जानबूझकर नागरिक ऊर्जा ग्रिड को निशाना बनाते हैं, तो यह सीधे तौर पर जिनेवा कन्वेंशन का उल्लंघन है। कीव की सड़कों पर दृश्य विचलित करने वाले हैं; लोग अपने घरों को छोड़कर आपातकालीन आश्रय स्थलों की ओर भाग रहे हैं, जहाँ जनरेटर के माध्यम से थोड़ी बहुत गर्मी और मोबाइल चार्ज करने की सुविधा उपलब्ध है।

इंजीनियर्स और तकनीकी टीमें जान जोखिम में डालकर ग्रिड को बहाल करने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन रूसी सेना ने डबल-टैप रणनीति अपनाई है यानी मरम्मत कार्य शुरू होते ही उन स्थानों पर दोबारा ड्रोन हमले किए जा रहे हैं। यह स्थिति न केवल कीव के लिए, बल्कि पूरे यूक्रेन के मनोबल के लिए एक बड़ी परीक्षा है। पूरी दुनिया की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय इस मानवीय संकट को रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाता है।