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किश्तवाड़ की मुठभेड़ में सात जवान घायल

ड्रोन आने जाने और सैटेलाइट फोन से मिले थे संकेत

  • उग्रवादियों के होने की पूर्व जानकारी मिली थी

  • आतंकवादियों में कुछ पाकिस्तानी लोग भी हैं

  • पूरे जंगली इलाके की घेराबंदी कर दी गयी है

राष्ट्रीय खबर

श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के दुर्गम और पथरीले इलाकों में छिपे आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ के दौरान भारतीय सेना के सात जवान घायल हो गए हैं। आधिकारिक सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह मुठभेड़ उस समय शुरू हुई जब सुरक्षा बल किश्तवाड़ के चत्रू इलाके में एक विशिष्ट खुफिया सूचना के आधार पर तलाशी अभियान चला रहे थे।

इसी दौरान वहां छिपे हुए आतंकवादियों ने अचानक सैनिकों पर अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। भारतीय जवानों ने भी इस हमले का पूरी ताकत से जवाब दिया और भारी गोलाबारी के बीच अपने घायल साथियों को सुरक्षित वहां से निकालकर अस्पताल पहुँचाने का साहसी कार्य किया।

भारतीय सेना की जम्मू स्थित व्हाइट नाइट कॉर्प्स ने इस विशेष सैन्य अभियान को ऑपरेशन त्राशी-I का नाम दिया है। यह अभियान रविवार दोपहर के आसपास शुरू हुआ था। एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक आधिकारिक पोस्ट के माध्यम से व्हाइट नाइट कॉर्प्स ने जानकारी साझा की कि सुरक्षा बलों और आतंकवादियों के बीच यह आमना-सामना चत्रू के उत्तर-पूर्व में स्थित सोनार नामक सामान्य क्षेत्र में हुआ। यह कार्रवाई जम्मू-कश्मीर पुलिस के साथ चल रहे संयुक्त आतंकवाद विरोधी अभ्यास के तहत किए जा रहे एक सुविचारित तलाशी अभियान का हिस्सा थी।

सेना के प्रवक्ता ने बताया कि क्षेत्र की घेराबंदी को और मजबूत करने के लिए अतिरिक्त बलों को मौके पर भेज दिया गया है। फिलहाल ऑपरेशन जारी है और नागरिक प्रशासन तथा अन्य सुरक्षा एजेंसियों के साथ करीबी समन्वय बनाकर आतंकवादियों के भागने के सभी रास्तों को सील कर दिया गया है। सेना ने चुनौतीपूर्ण भौगोलिक परिस्थितियों और शत्रुतापूर्ण गोलीबारी के बीच हमारे सैनिकों द्वारा दिखाए गए असाधारण पेशेवर व्यवहार और अटूट संकल्प की सराहना की है।

अधिकारियों के अनुसार, तलाशी टीमों में से एक का सामना दो से तीन विदेशी आतंकवादियों के एक समूह से हुआ। माना जा रहा है कि ये आतंकवादी पाकिस्तान स्थित प्रतिबंधित संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े हैं। घेराबंदी को तोड़ने और भागने के प्रयास में इन आतंकवादियों ने न केवल गोलियां चलाईं, बल्कि सुरक्षा बलों पर ग्रेनेड भी फेंके। इसके जवाब में सेना, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल और जम्मू-कश्मीर पुलिस की अतिरिक्त टुकड़ियों को तुरंत मौके पर भेजा गया। दोनों पक्षों के बीच रुक-रुक कर भारी गोलीबारी जारी है।

इस ऑपरेशन को गति देने और घने जंगलों में आतंकवादियों की सटीक लोकेशन का पता लगाने के लिए उन्नत निगरानी उपकरणों, आधुनिक ड्रोन्स और खोजी कुत्तों की मदद ली जा रही है। गौरतलब है कि इस साल जम्मू क्षेत्र में सुरक्षा बलों और आतंकवादियों के बीच यह तीसरी बड़ी मुठभेड़ है। इससे पहले 7 और 13 जनवरी को कठुआ जिले के बिलवार इलाके के कहोग और नजोत जंगलों में भी मुठभेड़ हुई थी।