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अंटार्कटिका के सूक्ष्म जीवों में माइक्रोप्लास्टिक

धरती पर प्लास्टिक प्रदूषण के बढ़ते खतरे का प्रमाण

  • सूक्ष्म जीव और प्लास्टिक का अंतर्ग्रहण

  • पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ता बुरा प्रभाव

  • यह कोई छोटी मोटी बात कतई नहीं है

राष्ट्रीय खबर

रांचीः पृथ्वी का सबसे दक्षिणी और निर्जन महाद्वीप, अंटार्कटिका, लंबे समय तक मानवीय हस्तक्षेप से मुक्त माना जाता रहा है। लेकिन हालिया वैज्ञानिक शोधों ने एक चौंकाने वाला और चिंताजनक खुलासा किया है। शोधकर्ताओं ने पाया है कि अंटार्कटिका के एकमात्र मूल निवासी कीट, अंटार्कटिक मिज (बेलिगा अंटार्कटिका) और वहां की मिट्टी में रहने वाले अन्य सूक्ष्म जीवों के शरीर के भीतर माइक्रोप्लास्टिक के कण मौजूद हैं। यह खोज इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह साबित करती है कि प्रदूषण ने अब पृथ्वी के सबसे सुरक्षित समझे जाने वाले अंतिम छोर को भी अपनी चपेट में ले लिया है।

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अंटार्कटिक मिज एक छोटा, पंखहीन कीट है जो वहां की कठोर परिस्थितियों में जीवित रहने के लिए अनुकूलित है। सूक्ष्मदर्शी विश्लेषण के दौरान, वैज्ञानिकों ने इन कीटों के पाचन तंत्र में पॉलीस्टाइनिन, पॉलीइथाइलीन और नायलॉन के सूक्ष्म रेशे पाए। ये कण इतने छोटे हैं कि इन्हें नग्न आंखों से नहीं देखा जा सकता, लेकिन ये इन जीवों के चयापचय और प्रजनन क्षमता को गंभीर रूप से प्रभावित कर रहे हैं।

हैरानी की बात यह है कि ये जीव उन क्षेत्रों में पाए गए जहाँ मानवीय आवाजाही न के बराबर है। वैज्ञानिकों का मानना है कि ये माइक्रोप्लास्टिक मुख्य रूप से दो रास्तों से यहाँ पहुँच रहे हैं। हवा के झोंकों के साथ प्लास्टिक के महीन कण हजारों मील का सफर तय करके अंटार्कटिका की बर्फ पर गिरते हैं। अंटार्कटिका में स्थित वैज्ञानिक स्टेशनों और वहां आने वाले पर्यटकों के कपड़ों से झड़ने वाले सिंथेटिक रेशे मिट्टी में मिल जाते हैं, जिन्हें ये सूक्ष्म जीव भोजन समझकर खा लेते हैं।

यह केवल एक कीट की समस्या नहीं है। अंटार्कटिक मिज वहां के खाद्य जाल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। जब ये छोटे जीव प्लास्टिक का सेवन करते हैं, तो वह प्लास्टिक खाद्य श्रृंखला में ऊपर की ओर बढ़ता है। इससे न केवल इन सूक्ष्म जीवों की मृत्यु दर बढ़ रही है, बल्कि मिट्टी की गुणवत्ता और वहां के नाज़ुक संतुलन पर भी खतरा मंडरा रहा है। यह अध्ययन इस बात का प्रमाण है कि प्लास्टिक प्रदूषण एक वैश्विक महामारी बन चुका है, जो भौतिक सीमाओं को पार कर चुका है।

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