Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
रीवा SP द्वारा रिटायर्ड IG सिकरवार पर निकाले 11.61 लाख की रिकवरी आदेश पर CAT ने लगाई रोक! SP को भेजा... ग्वालियर में बनेगा देश का नया टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन: 5 बड़ी कंपनियां करेंगी निवेश, ज्योतिरादित... अज्ञातवास में पांडवों की प्यास बुझाने प्रकट हुई थी बाणगंगा! शिवपुरी सिद्धेश्वर धाम में स्थापित हैं ओ... नर्मदापुरम दौरे पर पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह का बड़ा बयान: मूंग खरीदी की बढ़ेगी तारीख, तवा पुल प... सावन में क्यों झूलते हैं झूला? गुना में सावन आते ही पड़े झूले, जानें शिव-पार्वती और राधा-कृष्ण से जु... बड़वानी का ऐतिहासिक सिद्धनाथ महादेव मंदिर: जहां एक स्वयंभू तो दूसरा उड़कर आया था शिवलिंग, जानें राजा... ऐतिहासिक धार भोजशाला की मां वाग्देवी प्रतिमा की भारत वापसी अंतिम चरण में, लंदन से जल्द लौटेगी मूर्ति भोपाल में फर्जी क्राइम ब्रांच अफसर बनकर लूटपाट करने वाले गिरोह का भंडाफोड़, महिला मास्टरमाइंड समेत 4... इंदौर में फर्जी आधार कार्ड बनाकर नाबालिगों की शादी कराने वाले गिरोह का भंडाफोड़, 4 आरोपी गिरफ्तार दतिया उपचुनाव में करारी हार के बाद बीजेपी का कड़ा एक्शन, जिलाध्यक्ष सहित पूरा जिला संगठन तत्काल प्रभ...

आर्टेमिस-2 मिशन को लॉंच करने की तैयारियां जारी

पचास साल के लंबे अंतराल के बाद नासा ने फिर से तैयारी की

  • चंद्रमा की दहलीज पर मानव की वापसी

  • विशालता और इंजीनियरिंग का कमाल

  • अभियान में चार अंतरिक्ष यात्री भी होंगे

राष्ट्रीय खबर

रांची 17 जनवरी 2026 को अंतरिक्ष विज्ञान के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ा है। अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा  ने अपने महत्वाकांक्षी आर्टेमिस-2 मिशन के लिए रोल-आउट प्रक्रिया शुरू कर दी है। फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर में दुनिया का सबसे शक्तिशाली रॉकेट, स्पेस लॉन्च सिस्टम, अपनी असेंबली बिल्डिंग से निकलकर लॉन्च पैड 39बी की ओर रेंगते हुए बढ़ रहा है।

यह केवल एक रॉकेट का स्थानांतरण नहीं है, बल्कि आधुनिक इंजीनियरिंग की पराकाष्ठा है। लगभग 322 फीट ऊंचे इस रॉकेट और इसके ऊपर लगे ओरियन अंतरिक्ष यान का कुल वजन लाखों पाउंड में है। इसे ले जाने के लिए नासा अपने विशालकाय क्रॉलर-ट्रांसपोर्टर 2 का उपयोग कर रहा है। दिलचस्प बात यह है कि यह विशाल मशीन महज 1.6 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलती है। लगभग 6.4 किलोमीटर की इस यात्रा को पूरा करने में कई घंटे लगते हैं, लेकिन यह धीमी गति सुरक्षा और संतुलन के लिए अनिवार्य है।

देखें इससे संबंधित नासा का वीडियो

आर्टेमिस-2 मिशन इसलिए ऐतिहासिक है क्योंकि 1972 के अपोलो मिशन के बाद यह पहला अवसर होगा जब मनुष्य पृथ्वी की निचली कक्षा को छोड़कर गहरे अंतरिक्ष में जाएगा। इस मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री—रीड वाइजमैन, विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टीना कोच और जेरेमी हेन्सन—शामिल हैं। हालांकि वे चंद्रमा की सतह पर कदम नहीं रखेंगे, लेकिन उनका ओरियन कैप्सूल चंद्रमा के पीछे से चक्कर लगाते हुए पृथ्वी से लगभग 3,70,000 किलोमीटर दूर तक जाएगा।

लॉन्च पैड पर पहुँचने के बाद, वैज्ञानिक और इंजीनियर अगले कुछ हफ्तों तक रॉकेट की अंतिम जाँच और वेट ड्रेस रिहर्सल करेंगे। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य ओरियन के लाइफ सपोर्ट सिस्टम और मानव नियंत्रण प्रणालियों का परीक्षण करना है। यदि आर्टेमिस-2 सफल रहता है, तो यह आर्टेमिस-3 के लिए रास्ता साफ कर देगा, जिसका लक्ष्य 2020 के दशक के अंत तक चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर पहली महिला और पहले अश्वेत व्यक्ति को उतारना है। यह मिशन मंगल ग्रह तक पहुँचने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रशिक्षण स्थल के रूप में भी कार्य कर रहा है।

#आर्टेमिस2 #ArtemisII #नासा #NASA #अंतरिक्षमिशन #MoonMission #चंद्रयान #SpaceExploration #विज्ञान #DeepSpace