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हमास के हथियार डालने के मुद्दे पर अमेरिका की दो टूक

आसान रास्ता या कठिन रास्ता’: ट्रंप

वाशिंगटन: संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मध्य पूर्व संकट को लेकर एक बार फिर कड़ा रुख अपनाते हुए हमास को स्पष्ट चेतावनी दी है। ट्रंप ने हमास के विसैन्यीकरण की अपनी मांग को दोहराते हुए कहा है कि संगठन के पास अब केवल दो ही विकल्प बचे हैं: आसान रास्ता या कठिन रास्ता।

राष्ट्रपति ट्रंप का यह बयान गाजा में जारी संघर्ष और बंधकों की रिहाई के प्रयासों के बीच आया है। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि उनके प्रशासन की प्राथमिकता न केवल युद्ध विराम है, बल्कि क्षेत्र में दीर्घकालिक शांति सुनिश्चित करने के लिए हमास की सैन्य क्षमताओं को पूरी तरह समाप्त करना है। आसान रास्ते से उनका तात्पर्य हमास द्वारा बिना शर्त हथियार डालने और बंधकों को रिहा करने से है, जबकि कठिन रास्ते का अर्थ अमेरिका और उसके सहयोगियों द्वारा निरंतर सैन्य और आर्थिक दबाव का सामना करना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह बयान उनके शक्ति के माध्यम से शांति के सिद्धांत को दर्शाता है। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि जब तक हमास के पास सैन्य बुनियादी ढांचा रहेगा, तब तक इजरायल और फिलिस्तीन के बीच किसी भी स्थायी समाधान की संभावना कम है। इस मांग के माध्यम से ट्रंप ने न केवल हमास को, बल्कि उसे समर्थन देने वाले क्षेत्रीय देशों को भी कड़ा संदेश भेजा है।

ट्रंप की इस मांग ने वैश्विक राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। जहाँ इजरायल ने इस कड़े रुख का स्वागत किया है, वहीं कुछ अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों का मानना है कि ‘पूर्ण विसैन्यीकरण’ की शर्त युद्ध विराम की वार्ताओं को और जटिल बना सकती है। हालांकि, व्हाइट हाउस ने साफ कर दिया है कि वह अपनी शर्तों से पीछे नहीं हटने वाला है और हमास को जल्द से जल्द निर्णय लेना होगा।

डोनाल्ड ट्रंप का यह ‘अल्टीमेटम’ यह दर्शाता है कि उनका दूसरा कार्यकाल मध्य पूर्व में एक निर्णायक बदलाव लाने की दिशा में सक्रिय है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय और क्षेत्रीय खिलाड़ी इस नई मांग पर कैसी प्रतिक्रिया देते हैं और क्या हमास इस दबाव के आगे झुकता है।