पुतिन तैयार हैं, ज़ेलेंस्की नहीं: डोनाल्ड ट्रंप
वाशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूक्रेन युद्ध को लेकर एक बार फिर विवादित और चौंकाने वाला बयान दिया है। एक विशेष साक्षात्कार में ट्रंप ने स्पष्ट रूप से कहा है कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन शांति समझौते के लिए तैयार हैं, लेकिन यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की इस प्रक्रिया में बाधा डाल रहे हैं।
राष्ट्रपति ट्रंप ने ओवल ऑफिस में दिए गए साक्षात्कार के दौरान कहा, मुझे लगता है कि पुतिन समझौता करने के लिए तैयार हैं, लेकिन यूक्रेन कम तैयार है। जब उनसे पूछा गया कि अमेरिका के नेतृत्व वाली वार्ताएं अभी तक किसी नतीजे पर क्यों नहीं पहुँची हैं, तो ट्रंप ने सीधे तौर पर इसका कारण ज़ेलेंस्की को बताया। ट्रंप के अनुसार, ज़ेलेंस्की को शांति की ओर कदम बढ़ाने में कठिनाई हो रही है।
ट्रंप प्रशासन की ओर से पेश किए गए शांति प्रस्ताव (20-सूत्री योजना) के तहत यूक्रेन पर दबाव डाला जा रहा है कि वह पूर्वी डोनबास क्षेत्र और क्रीमिया पर अपना दावा छोड़ दे। इसके बदले में अमेरिका यूक्रेन को 15 साल की सुरक्षा गारंटी देने का प्रस्ताव दे रहा है। हालांकि, ज़ेलेंस्की ने सार्वजनिक रूप से किसी भी क्षेत्रीय रियायत से इनकार किया है, जो उनके देश के संविधान के विरुद्ध है।
ट्रंप का यह बयान उनके यूरोपीय सहयोगियों के रुख से बिल्कुल अलग है। यूरोपीय देशों का मानना है कि मॉस्को युद्ध को समाप्त करने में कोई वास्तविक रुचि नहीं रखता है और पुतिन की ‘तैयारी’ केवल एक कूटनीतिक चाल है। दूसरी ओर, ज़ेलेंस्की ने ट्रंप के दावों पर पलटवार करते हुए कहा कि रूस के ऊर्जा क्षेत्रों और शहरों पर लगातार हमले यह दर्शाते हैं कि पुतिन शांति नहीं, बल्कि विनाश चाहते हैं।
ट्रंप प्रशासन में विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुश्नर शांति वार्ता का नेतृत्व कर रहे हैं। ट्रंप का मानना है कि यूक्रेन को नाटो की सदस्यता के विचार को त्याग देना चाहिए और एक ‘तटस्थ देश’ के रूप में कार्य करना चाहिए। ट्रंप की नाराजगी का एक बड़ा कारण यह भी है कि यूक्रेन की ओर से सुरक्षा गारंटी के बदले युद्ध विराम पर तत्काल सहमति नहीं बन पा रही है।
डोनाल्ड ट्रंप का यह अल्टीमेटम न केवल यूक्रेन के लिए एक चुनौती है, बल्कि यह आगामी ‘वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम’ (दावोस) में होने वाली बैठकों की दिशा भी तय करेगा। यदि यूक्रेन अमेरिकी दबाव के आगे नहीं झुकता है, तो भविष्य में अमेरिकी सैन्य सहायता में कटौती की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।