यह पुरस्कार किसी और को नहीं दिया जा सकता
स्टॉकहोल्मः नोबल समिति ने स्पष्ट रूप से कहा है कि नोबेल पुरस्कार और विजेता अविभाज्य हैं। इसका अर्थ यह है कि एक बार जब किसी व्यक्ति या संस्था को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए चुन लिया जाता है, तो वह सम्मान उस व्यक्ति की पहचान का स्थायी हिस्सा बन जाता है।
इसे किसी कानूनी प्रक्रिया या व्यक्तिगत इच्छा के माध्यम से वापस नहीं लिया जा सकता। दरअसल यह बयान उस घटना के बाद जारी किया गया जब वेनेजुएला की नोबल पुरस्कार विजेता ने अपना पदक अमेरिकी राष्ट्रपति को सौंप दिया और खुद ट्रंप ने इसे बड़ा सम्मान बताया।
लेकिन नोबल कमेटी के बयान से यह साफ हो गया है कि वाशिंगटन में आयोजित समारोह में नोबल पुरस्कार पाना एक औपचारिकता भर है जिसकी नोबल कमेटी में कोई मान्यता नहीं है। दरअसल यह नोबल पुरस्कार माचाडो के नाम पर ही दर्ज रहेगा, जो इसकी असली हकदार रही है।
नोबल पुरस्कार कमेटी के बयान में यह भी स्पष्ट किया गया है कि पदक, डिप्लोमा या पुरस्कार राशि के साथ क्या होता है—चाहे वे खो जाएं, नष्ट कर दिए जाएं, या विजेता द्वारा वापस करने का प्रयास किया जाए—इससे आधिकारिक रिकॉर्ड पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। इतिहास के पन्नों में वही व्यक्ति विजेता के रूप में दर्ज रहेगा जिसे समिति ने मूल रूप से नामित किया था।
नोबेल फाउंडेशन के नियमों के अनुसार, नोबेल पुरस्कार को वापस लेने का कोई प्रावधान नहीं है। समिति का यह ताजा बयान इसी सिद्धांत की पुष्टि करता है। यह उन मांगों का एक प्रकार से उत्तर है जो अक्सर विवादित विजेताओं से पुरस्कार छीनने के लिए उठाई जाती हैं। समिति का मानना है कि पुरस्कार उस समय के मूल्यांकन पर आधारित होता है जब वह दिया गया था।