पीएनबी घोटाला में अब मेहुल के बेटे का नाम
राष्ट्रीय खबर
नई दिल्ली: भारत के सबसे चर्चित बैंकिंग घोटालों में से एक, पंजाब नेशनल बैंक धोखाधड़ी मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने आठ साल बाद एक सनसनीखेज खुलासा किया है। भगोड़े हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी के खिलाफ चल रही जांच में अब उसके बेटे, रोहन चोकसी की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। ईडी ने पहली बार आधिकारिक तौर पर यह स्वीकार किया है कि मनी लॉन्ड्रिंग के इस जटिल जाल को बुनने में पिता और पुत्र की जोड़ी एक साथ काम कर रही थी।
यह महत्वपूर्ण जानकारी ईडी ने दिल्ली स्थित प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट अपीलेट ट्रिब्यूनल के समक्ष अपनी लिखित दलीलों में पेश की है। गौर करने वाली बात यह है कि पिछले आठ वर्षों से जारी जांच के दौरान, रोहन चोकसी का नाम किसी भी केंद्रीय एजेंसी—चाहे वह सीबीआई हो या ईडी की एफआईआर या चार्जशीट में आरोपी के रूप में दर्ज नहीं था।
अचानक आए इस बयान ने न केवल कानूनी हलकों में हलचल पैदा कर दी है, बल्कि मेहुल चोकसी के प्रत्यर्पण के प्रयासों को भी एक नई दिशा दे दी है। ईडी का दावा है कि रोहन चोकसी न केवल अपने पिता के अवैध साम्राज्य के बारे में जानता था, बल्कि वह उन मुखौटा कंपनियों के प्रबंधन और धन के हस्तांतरण में भी सक्रिय रूप से शामिल था, जिनका उपयोग पीएनबी से लूटी गई राशि को ठिकाने लगाने के लिए किया गया था।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, मेहुल चोकसी ने एंटीगुआ और बारबुडा में अपनी नागरिकता के साथ-साथ अपने परिवार के सदस्यों का उपयोग अपनी संपत्तियों को सुरक्षित करने के लिए किया। ईडी की दलील है कि रोहन चोकसी का नाम अब तक प्रत्यक्ष रूप से सामने नहीं आने का कारण जांच की गोपनीयता और कड़ियों को जोड़ना था। अब जब सबूतों की श्रृंखला पूरी हो रही है, तो एजेंसी ने ट्रिब्यूनल को बताया है कि रोहन उस ‘मनी लॉन्ड्रिंग इकोसिस्टम’ का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है, जिसने करोड़ों रुपये की हेराफेरी को संभव बनाया।
ईडी के इस खुलासे के बाद अब यह सवाल उठने लगा है कि क्या रोहन चोकसी को भी औपचारिक रूप से पूरक चार्जशीट में नामजद किया जाएगा। यदि ऐसा होता है, तो चोकसी परिवार की अंतरराष्ट्रीय संपत्तियों को कुर्क करने और इंटरपोल के माध्यम से रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने की प्रक्रिया और अधिक प्रभावी हो जाएगी। मेहुल चोकसी का बेटा रोहन अब तक पर्दे के पीछे था, लेकिन ईडी की इस ताजा दलील ने उसे सीधे जांच के घेरे में ला खड़ा किया है। यह मामला दर्शाता है कि देश के साथ वित्तीय गबन करने वाले आरोपियों के खिलाफ जांच एजेंसियां कितनी गहराई से कड़ियों को खंगाल रही हैं, भले ही इसमें समय लगे।