दिल्ली की अदालत ने अलगाव वादी मामलों में फैसला दिया
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः नई दिल्ली की एक विशेष अदालत ने बुधवार को एक ऐतिहासिक और अत्यंत महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कश्मीरी अलगाववादी राजनीति के एक प्रमुख चेहरे, आसिया अंद्राबी और उनके दो करीबियों को देश के विरुद्ध युद्ध छेड़ने की साजिश रचने का दोषी करार दिया है।
पटियाला हाउस स्थित एनआईए की विशेष अदालत के न्यायाधीश चंदर जीत सिंह ने यह फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि आसिया अंद्राबी, सोफी फहमीदा और नाहिदा नसरीन न केवल भारत विरोधी गतिविधियों में लिप्त थीं, बल्कि वे एक प्रतिबंधित आतंकी संगठन की सक्रिय सदस्यता भी निभा रही थीं। आसिया अंद्राबी, जिन्होंने 1987 में कश्मीरी महिलाओं के कट्टरपंथी अलगाववादी समूह दुखतरान-ए-मिल्लत की नींव रखी थी, लंबे समय से भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर थीं। उन्हें अप्रैल 2018 में गिरफ्तार किया गया था और तब से वे जेल में ही हैं।
न्यायालय ने इन तीनों महिलाओं को कड़े आतंकवाद विरोधी कानून, गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) की धारा 18 (आतंकवादी कृत्य की साजिश रचना) और धारा 38 (आतंकवादी संगठन की सदस्यता से संबंधित अपराध) के तहत मुख्य रूप से दोषी पाया है। इसके अतिरिक्त, इनके विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की कई अन्य गंभीर धाराएं भी लगाई गई हैं।
इनमें धारा 121-ए (भारत सरकार के विरुद्ध युद्ध छेड़ने का षड्यंत्र), धारा 153-ए (विभिन्न समुदायों के बीच धर्म और स्थान के आधार पर शत्रुता फैलाना), धारा 120-बी (आपराधिक साजिश) और धारा 505 (सार्वजनिक शांति भंग करने के उद्देश्य से भड़काऊ बयान देना) शामिल हैं। फैसले की घोषणा के समय, सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच तीनों आरोपियों को व्यक्तिगत रूप से अदालत कक्ष में पेश किया गया था।
राष्ट्रीय जांच एजेंसी द्वारा दर्ज की गई प्राथमिकी के विवरण इस पूरे षड्यंत्र की भयावहता को दर्शाते हैं। जांच में यह तथ्य सामने आया कि अंद्राबी और उनके सहयोगियों ने सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्मों का सुनियोजित तरीके से उपयोग किया। उनका मुख्य उद्देश्य भारत की अखंडता, सुरक्षा और संप्रभुता को चुनौती देना तथा कश्मीरी युवाओं को जिहाद के नाम पर हिंसा के लिए उकसाना था।
अंद्राबी पर आरोप है कि उन्होंने खुलेआम जम्मू-कश्मीर के भारत से विलीनीकरण को चुनौती दी और घाटी को देश से अलग करने के लिए हिंसक प्रदर्शनों का नेतृत्व किया। अदालत ने माना कि उन्होंने प्रतिबंधित विदेशी आतंकी संगठनों से सक्रिय सहायता मांगी और भारत सरकार के प्रति घृणा फैलाने वाली दृश्य और लिखित सामग्री का बड़े पैमाने पर वितरण किया।
इस कानूनी जीत को कश्मीर घाटी में सक्रिय अलगाववादी नेटवर्क की कमर तोड़ने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है। आसिया अंद्राबी को पहली बार 2018 में अनंतनाग क्षेत्र में पत्थरबाजी की बड़ी घटनाओं और हिंसक दंगों की साजिश रचने के आरोप में पकड़ा गया था।
विशेष अदालत अब आगामी 17 जनवरी को सजा की अवधि पर विस्तृत बहस सुनेगी। कानून विशेषज्ञों का मानना है कि इन गंभीर धाराओं के तहत अंद्राबी और उनके साथियों को आजीवन कारावास जैसी कठोरतम सजा मिल सकती है। यह फैसला स्पष्ट संदेश देता है कि राष्ट्र की सुरक्षा और संप्रभुता के साथ समझौता करने वाली किसी भी गतिविधि को कानून बर्दाश्त नहीं करेगा।