धमतरी: 15 नवंबर 2025 से प्रदेश के सभी जिलों में एमएसपी दर पर धान की खरीदी की जा रही है. धान की खरीदी 31 जनवरी 2026 तक की जाएगी. शासन की ओर से सभी कलेक्टरों को आदेश है कि धान खरीदी की पूरी प्रक्रिया में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरती जाए. बावजूद इसके कई उपार्जन केंद्रों से किसानों की नाराजगी की खबरें सामने आते रहती है.
खाद्य निरीक्षक को कलेक्टर ने किया निलंबित
मगरलोड थाना क्षेत्र में एक ऐसे ही मामले में, खाद्य निरीक्षक पर कड़ी कार्रवाई जिला प्रशासन की ओर से की गई है. मगरलोड के धान उपार्जन केंद्र में तैनात खाद्य निरीक्षक रीना साहू पर कार्य में लापरवाही बरतने का गंभीर आरोप लगा है. जिसके बाद कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने मगरलोड खाद्य निरीक्षक रीना साहू को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का आदेश दिया है.
निलंबन अवधि में खाद्य निरीक्षक रीना साहू का मुख्यालय कार्यालय जिला खाद्य अधिकारी, धमतरी निर्धारित किया गया है. धमतरी के उपार्जन केंद्रों में लगातार सामने आ रही लापरवाही और अनियमितता पर कार्रवाई की जा रही है. धमतरी कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने निर्देश दिए हैं कि धान खरीदी में किसी तरह की लापरवाही या गलती बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
क्या है कर्मचारी पर आरोप
कलेक्ट्रेट से मिली जानकारी के अनुसार शासन की महत्वपूर्ण योजना समर्थन मूल्य पर धान खरीदी वर्ष 2025-26 के क्रियान्वयन में लापरवाही बरतने के आरोप में रीना साहू, खाद्य निरीक्षक मगरलोड, जिला धमतरी को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है. निलंबन आदेश संचालनालय खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण, इंद्रावती भवन, नवा रायपुर अटल नगर द्वारा जारी किया गया है. आरोप है कि धान उपार्जन के लिए जो नियम बनाए गए थे उन नियमों का पालन कर्मचारी के द्वारा नहीं किया गया. साथ ही समर्थन मूल्य पर धान खरीदी में अपेक्षित रुचि नहीं ली गई. यह कृत्य छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के प्रावधानों के प्रतिकूल पाए जाने पर कदाचरण की श्रेणी में माना गया. जिसके बाद निलंबन की कार्रवाई की गई.
धान खरीदी से जुड़ी कुछ बड़ी बातें
- सरकार ने सामान्य धान और ग्रेड-ए धान के लिए अलग-अलग MSP तय की है.
- 2025-26 के लिए लगभग ₹2369 (सामान्य) और ₹2389 (ग्रेड-ए) प्रति क्विंटल.
- धान की खरीद के लिए एक विशेष अवधि होती है, जो आमतौर पर नवंबर से फरवरी तक चलती है.
- 2025-26 के लिए 15 नवंबर से 31 जनवरी तक धान खरीदी होनी है.
- किसान सरकारी केंद्र में अपनी उपज बेचते हैं.
- धान खरीदी केंद्रों की संख्या और जगह जिला प्रशासन तय करता है.
- ‘टोकन तुंहर हाथ’ जैसे ऐप्स और वेबसाइटों के ज़रिए किसान ऑनलाइन टोकन प्राप्त कर रहे.
- आज से ऑफलाइन टोकन लेने की व्यवस्था भी शुरू हो गई.
- किसान के उपज को डिजिटल तौल और गुणवत्ता जांच के बाद लिया जा रहा.
- धान बेचने वाले किसानों को 24-48 घंटे के भीतर बैंक खाते में भुगतान सुनिश्चित किया जा रहा.
- छत्तीसगढ़ में मार्कफेड (छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी विपणन संघ मर्यादित) जैसी संस्थाएं धान खरीदी और प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं.