ग्वालियर: घाटीगांव थाना क्षेत्र में लकड़ी तस्कर माफिया और वन विभाग की टीम का आमना सामना हो गया, लकड़ी तस्कर ग्वालियर के सोन चिरैया अभ्यारण्य क्षेत्र में खैर के पेड़ों को काट कर लकड़ी की तस्करी की फिराक में थे. लेकिन वन अमले ने उनकी कोशिश नाकाम कर दी. लेकिन तस्कर भागने में सफल हो गए. हालांकि वन विभाग की टीम ने लकड़ी और माफिया के वाहन जब्त कर लिए हैं.
जंगल में चल रही थी खैर की तस्करी
असल में वन विभाग के अधिकारियों को मुखबिर से सूचना मिली थी कि, घाटीगांव के सोनचिरैया क्षेत्र के जंगल में खैर की लकड़ी की तस्करी का प्रयास करने वाले हैं. इस सूचना के आधार पर घाटीगांव रेंजर दीपांशु शर्मा की टीम ने देर रात जंगल में दबिश दी. जैसे ही टीम तस्करों के करीब पहुंची तो अफरा-तफरी मच गई. तस्करों ने टीम देखते ही लकड़ी तस्कर ट्रैक्टर-टॉली को तेज रफ्तार में जंगल के रास्तों से ले जाने में सफल रहे.
वन अमले से बचकर भागे तस्कर, गाड़ियां जप्त
वन विभाग के एसडीओ मनोज सिंह के मुताबिक, ”आरोपी तस्कर तो मौके से फरार होने में सफल रहे, लेकिन उनकी पहचान हो चुकी है. साथ ही मौके पर तस्कर अपनी कार और दो बाइक छोड़ गए, जिनको वन विभाग टीम ने अपने कब्जे में ले लिया. वहीं, टीम ने मौके पर तस्करों द्वारा काटी गई करीब 12 क्विंटल खैर की लकड़ी भी जप्त कर ली है.”
अंधेरे में काट दिए डेढ़ दर्जन पेड़
एसडीओ मनोज सिंह की मानें तो तस्करों में शामिल आरोपी की पहचान रामनिवास गुर्जर के रूप में हुई है, जो पहले से तस्करी के मामले फरार चल रहा है. और अब वन विभाग के अधिकारी उसे जल्द गिरफ्तार करने की बात कह रहे हैं. वन विभाग के अनुसार, तस्करों ने अंधेरे में 16 से 17 पुराने पेड़ों को काटकर उनके टुकड़े कर लिए थे. जिन्हें जप्ती के बाद वन विभाग ने डिपो में रखवा दिया है.
8 महीने पहले भी की थी बड़ी कार्रवाई
घाटीगांव का जंगल लंबे समय से खैर माफिया के लिए सॉफ्ट टारगेट बना हुआ है. इससे पहले 16 मई 2025 को भी वन विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए खैर की लकड़ी से भरे दो ट्रक जब्त किए थे. जो राजस्थान के रजिस्टर थे और ये ट्रक भी रामनिवास गुर्जर के थे.
गुजरात और हरियाणा में सबसे ज़्यादा डिमांड
खैर की लकड़ी की मांग गुजरात और हरियाणा के कत्था कारखानों में सबसे ज्यादा है. क्योंकि खैर के पेड़ के बीच वाले हिस्से से ही पान में उपयोग होने वाला कत्था तैयार किया जाता है. बाजार में कत्थे की कीमतें ज़्यादा होने से खैर की लकड़ी की तस्करी पर भी मुनाफा बढ़ गया है. इसी वजह से माफिया खैर की तस्करी के लिए सोनचिरैया अभ्यारण्य के जंगल को टारगेट कर रहे हैं.