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अधिकांश जलप्रपात भी अब ठंड में जम गये है

तेज बर्फवारी के बीच आनंद लेने जुटी है पर्यटकों की भीड़

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्ली: कश्मीर घाटी इन दिनों ‘चिल्लई कलां’ के दौर से गुजर रही है, जो 40 दिनों की सबसे भीषण ठंड की अवधि होती है। इस हाड़ कंपा देने वाली ठंड के बावजूद, गुलमर्ग के द्रंग में स्थित एक जमे हुए झरने को देखने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक उमड़ रहे हैं। यह नजारा न केवल प्रकृति की सुंदरता को दर्शाता है, बल्कि घाटी में पर्यटन के पुनरुद्धार का भी प्रतीक है। पिछले साल पहलगाम में हुए आतंकी हमले, जिसमें 26 नागरिकों की जान चली गई थी, के बाद पर्यटन उद्योग को गहरा धक्का लगा था, लेकिन अब पर्यटकों की यह भीड़ कश्मीर के बदलते और सुरक्षित होते माहौल की गवाही दे रही है।

घाटी में न्यूनतम तापमान में मामूली वृद्धि दर्ज की गई है, लेकिन इसके बावजूद कई जल स्रोत और विश्व प्रसिद्ध डल झील के हिस्से अभी भी जमे हुए हैं। रविवार रात श्रीनगर का न्यूनतम तापमान माइनस 2.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो पिछली रात के माइनस 5.2 डिग्री से थोड़ा अधिक है। हालांकि, दक्षिण कश्मीर का पुलवामा जिला माइनस 6.5 डिग्री सेल्सियस के साथ घाटी का सबसे ठंडा स्थान रहा। चिल्लई कलां की यह अवधि, जो 21 दिसंबर को शुरू हुई थी, 30 जनवरी तक जारी रहेगी। इस दौरान बर्फबारी की संभावना सबसे अधिक होती है और रात का पारा शून्य से कई डिग्री नीचे गिरना आम बात है।

केवल कश्मीर ही नहीं, बल्कि पूरा उत्तर भारत वर्तमान में भीषण शीतलहर की चपेट में है। देश की राजधानी दिल्ली में न्यूनतम तापमान 2.9 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया है, जबकि राजस्थान के कुछ हिस्सों में पारा शून्य से नीचे चला गया है। हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में भी तापमान लगातार शून्य के नीचे बना हुआ है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग  ने अपने बुलेटिन में चेतावनी दी है कि पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली में अगले कुछ दिनों तक गंभीर शीतलहर की स्थिति बनी रहेगी। साथ ही, अगले पांच दिनों तक उत्तर-पश्चिम भारत और बिहार में सुबह के समय घना कोहरा छाए रहने की संभावना है, जिससे सड़क और रेल यातायात प्रभावित हो सकता है।