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पहली बार रविवार को पेश होगा केंद्रीय बजट

आगामी एक फरवरी को निर्मला सीतारमण पेश करेंगी लेखा जोखा

  • राष्ट्रपति ने इसकी मंजूरी दे दी है

  • अवकाश के दिन भी काम काज होगा

  • कांग्रेस का आंकड़ों की बाजीगरी पर सवाल

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः भारतीय संसदीय इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। आगामी वित्त वर्ष 2026-27 के लिए केंद्रीय बजट इस बार रविवार को पेश किया जाएगा। सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने इस महत्वपूर्ण तिथि की पुष्टि करते हुए बताया कि केंद्र सरकार 1 फरवरी, 2026 (रविवार) को अपना वार्षिक लेखा-जोखा सदन के पटल पर रखेगी। आमतौर पर बजट कार्यदिवसों पर पेश किया जाता है, लेकिन इस बार सरकार ने रविवार की छुट्टी के बावजूद वित्तीय कार्यों की महत्ता को देखते हुए इसी दिन को चुना है।

वित्त मंत्री का आठवां बजट और सत्र का खाका देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इस बार अपना लगातार आठवां बजट पेश करने जा रही हैं। यह उनके व्यक्तिगत कार्यकाल और भारतीय राजनीति के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। इस घोषणा से पहले पिछले सप्ताह केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने आगामी बजट सत्र के विस्तृत कार्यक्रम की रूपरेखा साझा की थी। उन्होंने बताया कि बजट सत्र दो अलग-अलग चरणों में आयोजित किया जाएगा। सत्र का पहला चरण 28 जनवरी 2026 को राष्ट्रपति के अभिभाषण के साथ शुरू होगा और 13 फरवरी 2026 तक चलेगा। इसके बाद एक संक्षिप्त अवकाश के उपरांत दूसरा चरण 9 मार्च से शुरू होकर 2 अप्रैल 2026 तक चलेगा।

संसदीय कार्य मंत्री के अनुसार, भारत सरकार की सिफारिशों को स्वीकार करते हुए माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने बजट सत्र 2026 के लिए दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) को आहूत करने की औपचारिक मंजूरी दे दी है। परंपरा के अनुसार, साल के पहले सत्र की शुरुआत राष्ट्रपति द्वारा दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित करने से होती है, जिसमें सरकार की भावी नीतियों और उपलब्धियों का खाका प्रस्तुत किया जाता है। इसके बाद ही विधायी कार्यों और बजटीय चर्चाओं को आगे बढ़ाया जाता है।

एक तरफ जहां सरकार बजट की तैयारियों में जुटी है, वहीं विपक्षी दल कांग्रेस ने देश की आर्थिक स्थिति को लेकर कड़े सवाल उठाए हैं। 12 जनवरी 2026 को एक बयान जारी करते हुए कांग्रेस ने राजकोषीय संघवाद की कमजोर होती स्थिति, निजी निवेश में आती गिरावट और समाज में बढ़ती आर्थिक असमानता पर गहरी चिंता व्यक्त की।

विपक्ष ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था वर्तमान में गंभीर संरचनात्मक चुनौतियों से जूझ रही है। कांग्रेस ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि इन बुनियादी समस्याओं का समाधान केवल आंकड़ों की बाजीगरी या सांख्यिकीय भ्रम पैदा करके नहीं निकाला जा सकता, बल्कि इसके लिए ठोस धरातलीय सुधारों की आवश्यकता है।

यह बजट सत्र न केवल वित्तीय दृष्टिकोण से बल्कि राजनीतिक दृष्टिकोण से भी काफी हंगामेदार रहने की संभावना है, क्योंकि इसमें एक ओर सरकार के भविष्य के विकास लक्ष्य होंगे, तो दूसरी ओर विपक्ष द्वारा उठाए गए ज्वलंत आर्थिक मुद्दे।