भारत-चीन संबंधों में जमी बर्फ पिघली 2020 के बाद पहली बार हुआ
राष्ट्रीय खबर
नई दिल्ली: भारत और चीन के बीच कूटनीतिक संबंधों में सुधार के एक बड़े संकेत के रूप में, चीनी कम्युনিस्ट पार्टी के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को दिल्ली स्थित भारतीय जनता पार्टी मुख्यालय का दौरा किया। 2020 में गलवान घाटी में हुए संघर्ष के बाद यह दोनों देशों के सत्ताधारी दलों के बीच पहली औपचारिक पार्टी-टू-पार्टी वार्ता है।
सीपीसी के अंतर्राष्ट्रीय संपर्क विभाग के छह सदस्यीय इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उप-मंत्री सुन हैयान ने किया। भाजपा की ओर से पार्टी महासचिव अरुण सिंह और विदेश मामलों के विभाग के प्रभारी विजय चौथाईवाले ने प्रतिनिधिमंडल की मेजबानी की। बैठक में भारत में चीन के राजदूत जू फीहोंग भी मौजूद रहे।
यह बैठक अक्टूबर 2024 में रूस के कज़ान में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई ऐतिहासिक मुलाकात के बाद शुरू हुई सुधार प्रक्रिया का हिस्सा है। पिछले एक साल में दोनों देशों ने विश्वास बहाली के लिए कई ठोस कदम उठाए हैं।
2020 से निलंबित इस यात्रा को 2025 में फिर से शुरू किया गया, और 2026 के लिए तीर्थयात्रियों के बड़े जत्थों पर चर्चा जारी है। चीन और भारत के बीच सीधी उड़ानों को बहाल कर दिया गया है और व्यापारियों व पर्यटकों के लिए वीजा नियमों को सरल बनाया गया है। हाल ही में भारत सरकार ने चीनी कंपनियों को सरकारी अनुबंधों के लिए बोली लगाने की अनुमति देने पर विचार शुरू किया है।
सिर्फ भाजपा ही नहीं, चीनी प्रतिनिधिमंडल आज राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों से भी मुलाकात कर सकता है। यह मुलाकात संघ के शताब्दी वर्ष समारोहों के बीच हो रही है, जिसे रणनीतिक विशेषज्ञ ट्रैक-2 डिप्लोमेसी के रूप में देख रहे हैं। इसके अलावा, प्रतिनिधिमंडल के कांग्रेस नेताओं से भी मिलने की संभावना है।
हालांकि सीमा विवाद और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा पूरी तरह खत्म नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक दलों के बीच इस तरह का संवाद यह दर्शाता है कि दोनों देश अब केवल सरकारी स्तर पर ही नहीं, बल्कि वैचारिक और सांगठनिक स्तर पर भी तनाव कम करने की कोशिश कर रहे हैं।