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जेलीफिश बुढ़ापे के बाद बच्चा कैसे बन जाती है

अमरत्व की तरफ जारी शोध में नये रहस्य का खुलासा

  • डीएनए को पूरा डी कोड किया गया है

  • टीलोमेरेस को दोबारा नया कर लेता है

  • कई बीमारियों में मददगार होगी यह

राष्ट्रीय खबर

रांचीः स्पेन की ओविएडो यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने जिस रहस्य से पर्दा उठाया है, वह मानव इतिहास की सबसे बड़ी खोजों में से एक साबित हो सकता है। हम बात कर रहे हैं टुरिटोप्सिस डोहर्नी की, जिसे दुनिया इमोर्टल जेलीफ़िश या अमर जेलीफ़िश के नाम से जानती है।क्या है इसकी खासियत?आम तौर पर हर जीव का एक जीवन चक्र होता है: जन्म, विकास, प्रजनन और मृत्यु। लेकिन यह नन्ही सी जेलीफ़िश इस चक्र को तोड़ देती है। जब यह जेलीफ़िश घायल होती है, बीमार पड़ती है या बूढ़ी हो जाती है, तो यह मरने के बजाय अपनी कोशिकाओं को पुनर्जीवित करना शुरू कर देती है। यह अपने वयस्क रूप से वापस अपने शुरुआती रूप में लौट जाती है। इसे विज्ञान की भाषा में ट्रांसडिफरेंशिएशन कहा जाता है।

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सरल शब्दों में कहें तो, यह वैसा ही है जैसे कोई बूढ़ा इंसान वापस एक नवजात शिशु बन जाए।जीनोम डिकोडिंग से क्या खुला राज?हालिया शोध में वैज्ञानिकों ने इस जेलीफ़िश के पूरे जीनोम को डिकोड किया है। उन्होंने इसकी तुलना इसकी करीबी प्रजाति टुरिटोप्सिस रुब्रा से की, जो अमर नहीं है।

अध्ययन में पाया गया कि अमर जेलीफ़िश के पास डीएनए की मरम्मत और सुरक्षा करने वाले जीन की संख्या बहुत अधिक है।इसके डीएनए में ऐसे विशेष गुण हैं जो टीलोमेरेस को छोटा होने से रोकते हैं। इंसानों में, जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, टीलोमेरेस छोटे होते जाते हैं, जिससे कोशिकाएं कमजोर होती हैं और हम बूढ़े हो जाते हैं।

लेकिन यह जेलीफ़िश अपने टीलोमेरेस को फिर से जीवंत कर लेती है। क्या इस शोध का मतलब यह है कि इंसान भी अमर हो जाएगा? फिलहाल तो नहीं, लेकिन यह खोज कैंसर, अल्जाइमर और हृदय रोगों जैसी उम्र से संबंधित बीमारियों के इलाज में क्रांतिकारी साबित हो सकती है। वैज्ञानिक यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या हम जेलीफ़िश के उन विशेष प्रोटीनों का उपयोग मानव कोशिकाओं को रिपेयर करने के लिए कर सकते हैं। यह शोध हमें बुढ़ापे की प्रक्रिया को धीमा करने या अंगों को पुनर्जीवित करने की दिशा में एक नई दृष्टि प्रदान करता है।

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