दूतावास की गाड़ी बताकर भूटान की कार केरल में बेची
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भूटान में टैक्स काफी कम लगता है
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दिल्ली के मुख्य आरोपी की पहचान
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पहले भी ऐसी घटना हो चुकी है
राष्ट्रीय खबर
चेन्नईः कोच्चि की एर्नाकुलम सेंट्रल पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय कार तस्करी और धोखाधड़ी के एक सनसनीखेज मामले में दिल्ली के एक वाहन ब्रोकर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। यह कार्रवाई केरल के एक निवासी की शिकायत पर आधारित है, जिसे डिप्लोमैटिक व्हीकल (राजनयिक वाहन) के नाम पर ठगा गया था। यह मामला भारत और भूटान के बीच चल रहे एक बड़े तस्करी रैकेट का हिस्सा है, जिसका खुलासा सीमा शुल्क विभाग के ऑपरेशन नुमखोर के जरिए हुआ है।
दूतावास के नाम पर झांसा मामले के मुख्य आरोपी, दिल्ली के लाजपत नगर निवासी रोहित बेदी पर आरोप है कि उसने कोच्चि के निवासी मोहम्मद याह्या को एक उच्च श्रेणी की टोयोटा लैंड क्रूजर कार बेची। आरोपी ने खरीदार को विश्वास दिलाया कि यह कार पहले भारतीय दूतावास द्वारा उपयोग की जा रही थी। आमतौर पर दूतावास के वाहनों को अच्छी स्थिति और प्रतिस्पर्धी कीमतों के कारण खरीदार आसानी से पसंद कर लेते हैं, और इसी मनोविज्ञान का फायदा उठाकर आरोपी ने याह्या से 14 लाख रुपये वसूल लिए। यह लेनदेन जून और जुलाई 2024 के बीच नकद और बैंक ट्रांसफर के माध्यम से कई चरणों में पूरा किया गया था।
यह मामला अकेले एक धोखाधड़ी तक सीमित नहीं है। सीमा शुल्क विभाग ने पाया है कि एक संगठित सिंडिकेट भूटान से भारत में लग्जरी कारों की तस्करी कर रहा है। भूटान में वाहनों पर आयात शुल्क भारत की तुलना में काफी कम है। तस्कर वहां से नई या पुरानी एसयूवी खरीदते हैं और उन्हें भारत में अवैध रूप से लाते हैं। भारत के भारी आयात शुल्क से बचने के लिए ये गिरोह एक शातिर तरीका अपनाते हैं। वे विदेश मंत्रालय या भारतीय सेना जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के नाम पर फर्जी अनापत्ति प्रमाणपत्र तैयार करते हैं। इन फर्जी दस्तावेजों का उपयोग करके, वे हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में वाहनों का पंजीकरण कराते हैं ताकि उनकी असली पहचान छिपाई जा सके। पंजीकरण के बाद, इन कारों को केरल और अन्य दक्षिणी राज्यों के निर्दोष खरीदारों को बेच दिया जाता है।
पुलिसिया कार्रवाई और कानूनी जांच शिकायतकर्ता की कार को पिछले साल अक्टूबर में सीमा शुल्क विभाग ने जब्त कर लिया था, जिसके बाद उसे अहसास हुआ कि उसके साथ धोखाधड़ी हुई है। एर्नाकुलम पुलिस ने अब रोहित बेदी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 406 (विश्वासघात) और 420 (धोखाधड़ी) के तहत मामला दर्ज किया है। जांच अधिकारी अब बैंक स्टेटमेंट, वाहन के पिछले पंजीकरण रिकॉर्ड और आरोपियों के कॉल डेटा की गहराई से जांच कर रहे हैं ताकि इस तस्करी नेटवर्क के अन्य सदस्यों तक पहुँचा जा सके।