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इसरो के महत्वाकांक्षी परियोजना को लगा जोरदार झटका

पीएसएलवी विफल 16 उपग्रह अंतरिक्ष में लापता

  • डीआरडीओ का सैटेलाइट भी था

  • कई विदेशी सैटेलाइट भी नष्ट हुए

  • तीसरे चरण में रास्ता खटक गया

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के लिए सोमवार का दिन बेहद निराशाजनक रहा। श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से सुबह 10:18 बजे उड़ान भरने वाला भारत का भरोसेमंद वर्कहॉर्स रॉकेट, पीएलएलवी सी 62 अपने मिशन को पूरा करने में विफल रहा। इसरो ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि रॉकेट के तीसरे चरण के दौरान तकनीकी विचलन देखा गया, जिसके कारण यह अपने निर्धारित पथ से भटक गया

मिशन का घटनाक्रम और तकनीकी खराबी पीएसएलवी सी 62 की उड़ान के शुरुआती चरण योजना के अनुसार रहे। रॉकेट के पहले और दूसरे चरण ने सामान्य प्रदर्शन किया, लेकिन जैसे ही रॉकेट ने तीसरे चरण में प्रवेश किया, इसकी गति और दिशा में अनियमितता देखी गई। इसरो के अध्यक्ष डॉ. वी. नारायणन ने बताया कि रॉकेट अपेक्षित प्रक्षेपवक्र पर आगे नहीं बढ़ सका। आमतौर पर पीएसएलवी के तीसरे चरण में आने वाली किसी भी खराबी का परिणाम मिशन की पूर्ण विफलता के रूप में निकलता है, क्योंकि यह उपग्रहों को सही ऊंचाई और कक्षा में स्थापित करने के लिए आवश्यक वेग प्रदान करने में अक्षम हो जाता है।

2025 की विफलता के बाद कमबैक की कोशिश नाकाम यह मिशन इसरो के लिए साख का विषय था क्योंकि यह 2025 में हुई पिछली विफलता के बाद पहली बड़ी उड़ान थी। वर्ष 2025 में भी पीएसएलवी के एकमात्र प्रक्षेपण में तीसरे चरण की खराबी के कारण मिशन विफल रहा था। हालांकि इसरो ने उस समय विफलता विश्लेषण समिति का गठन किया था, लेकिन उस जांच के निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किए गए थे। 2026 के इस पहले मिशन से उम्मीद थी कि इसरो ने पुरानी तकनीकी खामियों को दूर कर लिया है, लेकिन लगातार दूसरी विफलता ने रॉकेट की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

विदेशी ग्राहकों और स्टार्टअप्स पर असर इस मिशन की विफलता न केवल इसरो के लिए तकनीकी झटका है, बल्कि इसके गहरे आर्थिक और रणनीतिक निहितार्थ भी हैं। रॉकेट में कुल 16 उपग्रह सवार थे, जिनमें शामिल थे। अन्वेषा रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन द्वारा विकसित एक महत्वपूर्ण निगरानी उपग्रह। ईओएस एन 1 भारत का अत्याधुनिक अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट। विदेशी उपग्रहों में ब्राजील, नेपाल और ब्रिटेन जैसे देशों के पेलोड।

हैदराबाद स्थित स्टार्टअप ध्रुव स्पेस के 7 उपग्रह इस मिशन का हिस्सा थे, जिससे निजी अंतरिक्ष क्षेत्र को भारी आर्थिक क्षति हुई है। पीएसएलवी के अब तक के 64 मिशनों में यह पांचवीं विफलता है। हालांकि यह रिकॉर्ड अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खराब नहीं है, लेकिन लगातार दो बार एक ही चरण (तीसरे चरण) में विफलता अंतरिक्ष एजेंसी की गुणवत्ता नियंत्रण प्रक्रिया पर प्रश्नचिह्न लगाती है। यह विफलता ऐसे समय में आई है जब भारत एलएंडटी और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के कंसोर्टियम के माध्यम से पीएसएलवी के व्यावसायिक उत्पादन की तैयारी कर रहा है। डेटा का गहन विश्लेषण जारी है और आने वाले दिनों में इसरो इस पर विस्तृत रिपोर्ट साझा कर सकता है।