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डीएनए के भीतर छिपी एक नई दुनिया का खुलासा

परत दर परत को समझने में वक्त लगाया वैज्ञानिकों ने

  • डीएनए संरचना और जीन सक्रियता

  • रोगों के उपचार में क्रांतिकारी बदलाव

  • उपचार के नये रास्ते खोलेगा यह

राष्ट्रीय खबर

रांचीः वैज्ञानिकों ने जीवित कोशिकाओं के भीतर मानव डीएनए के मुड़ने, लूप बनाने और स्थानांतरित होने के अब तक के सबसे विस्तृत मानचित्र तैयार किए हैं। यह शोध आनुवंशिक नियंत्रण की एक छिपी हुई परत को उजागर करता है और यह समझने की दिशा में एक बड़ा कदम है कि डीएनए की संरचना मानव जीव विज्ञान को कैसे आकार देती है। नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने 4 डी न्यूक्लिओम प्रोजेक्ट के साथ मिलकर यह शोध ‘नेचर’ पत्रिका में प्रकाशित किया है। यह अध्ययन दिखाता है कि कोशिकाएं जब विकसित होती हैं, कार्य करती हैं और विभाजित होती हैं, तो उनके भीतर जीन कैसे एक-दूसरे के साथ अंतःक्रिया करते हैं।

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कोशिका के भीतर डीएनए एक सीधी रेखा में नहीं होता। इसके बजाय, यह मुड़कर लूप (loops) बनाता है और कोशिका के नाभिक के भीतर अलग-अलग हिस्से बनाता है। ये भौतिक व्यवस्थाएं यह नियंत्रित करने में मदद करती हैं कि कौन से जीन सक्रिय होंगे और कौन से निष्क्रिय। यही प्रक्रिया विकास, कोशिका की पहचान और बीमारियों के जोखिम को निर्धारित करती है।

अनुसंधान दल ने मानव भ्रूण स्टेम सेल और फाइब्रोब्लास्ट का उपयोग करके इन मानचित्रों को तैयार किया। शोध के मुख्य निष्कर्षों में शामिल हैं। प्रत्येक कोशिका प्रकार में 1,40,000 से अधिक क्रोमैटिन लूप्स की पहचान। नाभिक के भीतर क्रोमोसोमल डोमेन की विस्तृत स्थिति। एकल-कोशिका स्तर पर संपूर्ण जीनोम के उच्च-रिज़ॉल्यूशन 3 डी मॉडल।

शोधकर्ताओं ने ऐसे कम्प्यूटेशनल उपकरण भी विकसित किए हैं जो केवल डीएनए अनुक्रम के आधार पर यह अनुमान लगा सकते हैं कि जीनोम कैसे मुड़ेगा। नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर फेंग यू के अनुसार, यह क्षमता बीमारियों का कारण बनने वाले म्यूटेशन की पहचान को तेज कर सकती है। चूँकि मानव रोगों से जुड़े अधिकांश वेरिएंट जीनोम के गैर-कोडिंग क्षेत्रों में स्थित होते हैं, इसलिए यह समझना महत्वपूर्ण है कि वे जीन अभिव्यक्ति को कैसे प्रभावित करते हैं।

भविष्य में, यह शोध कैंसर (जैसे ल्यूकेमिया और ब्रेन ट्यूमर), विकासात्मक विकारों और अन्य आनुवंशिक बीमारियों के लिए नई नैदानिक रणनीतियों और उपचारों का मार्ग प्रशस्त कर सकता है। वैज्ञानिकों का अगला लक्ष्य यह पता लगाना है कि दवाओं के माध्यम से इन संरचनाओं को कैसे लक्षित किया जा सकता है।

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