पन्ना : एक तरफ केन-बेतवा लिंक परियोजना पर काम तेजी से चल रहा है तो दूसरी ओर विस्थापित गांवों के लोग लगातार धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं. विस्थापन को लेकर दिए जा रहे मुआवजे व सुविधाओं को काफी कम बताकर पन्ना जिले के 8 गांवों के ग्रामीणों ने कलेक्टर दफ्तर पहुंचकर प्रदर्शन किया. ग्रामीणों ने प्रशासनिक अफसरों से कहा “घर और जमीन खोने का दर्द आप नहीं समझ सकते. अब मुआवजा भी इतना कम दिया जा रहा है कि हम आगे का जीवन कैसे जिएंगे.”
पन्ना कलेक्ट्रेट पर किसानों का चक्काजाम
केन-बेतवा लिंक परियोजना के तहत छतरपुर और पन्ना जिले के 25 गांवों को विस्थापित किया जा रहा है. इनमें 8 गांव पन्ना जिले के हैं. विस्थापन के विरोध में इन गांवों के लोगों ने पन्ना कलेक्ट्रेट में पहुंचकर प्रदर्शन किया. इस दौरान गांवों की महिलाएं एवं बुजुर्ग भी शामिल हुए. प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने रास्ता जाम कर दिया. उनका कहना था “जब तक कलेक्टर ज्ञापन लेने नहीं पहुंचते हैं और हमारी मांगे नहीं सुनते हैं, तब तक हम यहां से नहीं हटेंगे.”
अलग-अलग तिथियों पर मुआवजा लागू करने का विरोध
ग्रामीणों के साथ पहुंचे समाजसेवी अमित भटनागर का कहना है “पन्ना जिले के कुड़न, गहदरा, कोनी, मझोली, मरहा, कटहरी, बिलहटा, ख़मरी गांव विस्थापित हो रहे हैं. इनके साथ मुआवजे में विसंगतियां की जा रही हैं. मुआवजे में दो नियम क्यों हैं, धारा 11 को छतरपुर और पन्ना जिले में अलग-अलग तारीख को लागू किया गया है. पन्ना जिले के लोगों को मुआवजे से अलग किया जा रहा है. तारीखों में अंतर करने से पन्ना जिले के कई नवयुवक जिनके बच्चे भी हो गए हैं, उन्हें मुआवजे से अलग किया जा रहा है.”
ग्रामीणों ने विस्थापन के लिए प्रशासन से मांगे 6 माह
ग्रामीणों का कहना है “मुआवजा राशि वितरित होने के बाद नया घर बनाने और फसल काटने के लिए 6 माह का अलग समय दिया जाना चाहिए. इससे लोग व्यवस्थित रूप से स्थापित हो सकें.” पर प्रशासन द्वारा अड़ियल रवैया अपना कर मनमानी की जा रही है. गांव की लाइट एवं स्कूलों को बंद करवाया जा रहा है. बच्चों की इस वर्ष की पढ़ाई पूरी हो जाए, तब स्कूलों को बंद किया जाए. इस मामले में एसडीएम पन्ना संजय कुमार नागवंशी का कहना है “ग्रामीणों की समस्याओं को सुना गया. उनसे कहा गया कि नियम अनुसार ही कार्रवाई की जाएगी.”
मुआवजे में भेदभाव से नाराज ग्रामीण
पन्ना के किसान नेता जय राम यादव का कहना है “मुआवजा बंटवारे में पन्ना के आदिवासी अशिक्षित लोगों के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार किया गया है और प्रशासन में मनमानी की है. प्रशासन द्वारा गुपचुप तरीके से ग्राम सभा आयोजित की गई और किसी को बताया नहीं गया.”
गुजरात की तरह मुआवजा क्यों नहीं
इस मामले में जबलपुर में रहने वाले भारतीय किसान संघ के नेता राघवेंद्र पटेल का कहना है “2013 के भूमि अधिग्रहण कानून में सरकार ने जमीन के दाम का 4 गुना तक मुआवजा देने की बात कही है लेकिन मध्य प्रदेश केवल दोगुना मुआवजा दे रहा है. सरकार को चाहिए कि गुजरात की ही तरह विकास परियोजनाओं में जिन किसानों की जमीन जा रही है, उन्हें चार गुना तक मुआवजा दिया जाए.”
किसानों की सहमति भी लेनी चाहिए
किसान नेता राघवेंद्र पटेल का कहना है “जब भी किसानो की जमीन पर कोई परियोजना स्वीकृत की जाती है तो जिन किसानों की जमीन का अधिग्रहण किया जा रहा है उनसे सहमति जरूर लें क्योंकि अभी तक इस मामले में केवल पंचायत की सहमति पर परियोजनाओं को स्वीकृति दे दी जाती है, जिसे बाद में किसानों को प्रदर्शन करना पड़ता है.”
क्या है केन-बेतवा लिंक परियोजना
केन-बेतवा लिंक परियोजना का मकसद मध्य प्रदेश की केन नदी के अतिरिक्त पानी को उत्तर प्रदेश की सूखाग्रस्त बेतवा नदी में स्थानांतरित करना है. योजना के मुताबिक इससे दोनों राज्यों के बुंदेलखंड के इलाकों को सिंचाई का पर्याप्त पानी मिल सकेगा. इसके साथ ही बिजली की कमी भी पूरी होगी. इस परियोजना के तहत दौधन बांध बनेगा. लंबी नहरें बनाने के साथ ही जलविद्युत और सौर ऊर्जा उत्पादन भी किया जाएगा.
परियोजना के तहत 10.62 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई होने का दावा किया जा रहा है. परियोजना का शिलान्यास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिसंबर 2024 में किया था. परियोजना में उत्तर प्रदेश के झांसी, बांदा, महोबा और मध्य प्रदेश के पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़ जिले शामिल हैं.
इसिलए हो रहा परियोजना का विरोध
केन बेतवा लिंक परियोजना के तहत सबसे ज्यादा विरोध छतरपुर व पन्ना जिले में देखने को मिल रहा है. छतरपुर में मुआवजे में विसंगितयों को लेकर कई दिनों तक प्रदर्शन हुआ. लेकिन जिला प्रशासन द्वारा लगातार समझाइश के बाद छतरपुर के लोग विस्थापन को राजी हो गए.
पन्ना जिले के 8 गांवों के लोगों में रोष देखने को मिल रहा है. यहां के लोगों का कहना है कि उन्हें जबरन विस्थापित किया जा रहा है. उनके साथ मुआवजे में भेदभाव किया जा रहा है. ग्रामीणों की मांग है कि उन्हें छतरपुर जिले की भांति मुआवजे का लाभ दिया जाए और विस्थापन के लिए कम से 6 माह की मोहलत भी दी जाए.
परियोजना के दुष्प्रभाव भी पड़ने की आशंका
केन बेतवा लिंक परियोजना के सरकार लाभ ही लाभ बता रही है लेकिन इसका दूसरा पहलू भी है. जानकारों का कहना है कि इससे पन्ना टाइगर रिजर्व का एक बड़ा हिस्सा पानी में डूब जाएगा. वन्यजीवों पर खतरा है. पन्ना टाइगर रिजर्व का करीब 40 फीसदी हिस्सा परियोजना में चला जाएगा. बाघों के साथ ही अन्य वन्यजीवों के खत्म होने का खतरा है. बड़ी संख्या में हरियाली भी खत्म हो जाएगी. एक अनुमान के मुताबिक 46 लाख पेड़ों की कटाई होगी.