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पाकिस्तान और अफगानिस्तान सीमा खोलेंगे

अक्टूबर से जारी गतिरोध समाप्त करने पर सहमति बनी

इस्लामाबाद: पाकिस्तान और अफगानिस्तान ने व्यापार के लिए सीमा को फिर से खोलने हेतु औपचारिक बातचीत करने के लिए व्यापारिक नेताओं की एक 13 सदस्यीय संयुक्त समिति गठित करने पर सहमति व्यक्त की है। यह महत्वपूर्ण निर्णय सोमवार, 5 जनवरी 2026 को लिया गया। उल्लेखनीय है कि पिछले साल अक्टूबर से ही दोनों देशों के बीच सीमाएं बंद हैं।

यह गतिरोध अफगानिस्तान से उत्पन्न होने वाली उग्रवाद की समस्या पर दोनों पक्षों के बीच हुए टकराव के बाद पैदा हुआ था। इस नवगठित संयुक्त समिति में पाकिस्तान के छह और अफगानिस्तान के सात सदस्यों को शामिल किया गया है।

पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व फेडरेशन ऑफ पाकिस्तान चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष के सलाहकार सैयद जवाद हुसैन काजमी करेंगे, जबकि अफगान पक्ष का नेतृत्व मोहम्मद वली अमीनी द्वारा किया जाएगा। मीडिया से बात करते हुए श्री काजमी ने स्पष्ट किया कि इन वार्ताओं का प्राथमिक उद्देश्य पाक-अफगान व्यापार मार्गों को तत्काल खोलना, सीमा प्रबंधन में आने वाली बाधाओं को दूर करना और द्विपक्षीय व्यापार की निरंतरता सुनिश्चित करना है। उन्होंने आगे कहा कि व्यापारियों और आम जनता को होने वाली समस्याओं का स्थायी समाधान निकालने के लिए एक व्यापक और व्यावहारिक रोडमैप तैयार किया जाएगा।

काजमी ने बातचीत के सकारात्मक परिणामों के प्रति आशा व्यक्त की और बताया कि पाकिस्तान सरकार ने इस समिति को पूर्ण निर्णय लेने का अधिकार दिया है, ताकि बातचीत सार्थक और प्रभावी हो सके। पाकिस्तानी समिति में क्वेटा, खैबर और वज़ीरिस्तान चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्षों सहित कई अनुभवी व्यापारिक नेताओं को जगह दी गई है। वहीं, अफगान पक्ष में गजनी, नंगरहार, हेरात, कंधार, काबुल और खोस्त के वाणिज्य मंडलों के प्रतिनिधि शामिल हैं।

तनाव बढ़ने के कारण पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सभी व्यापारिक क्रॉसिंग हर तरह की आवाजाही के लिए बंद रही हैं, जिससे दोनों देशों के व्यापारियों को भारी वित्तीय नुकसान हुआ है। व्यापारिक समुदायों ने इस संयुक्त समिति के गठन का स्वागत किया है। उन्हें उम्मीद है कि इस पहल से तोरखम और अन्य महत्वपूर्ण सीमा क्रॉसिंग फिर से खुल जाएंगे, जिससे द्विपक्षीय व्यापार और आर्थिक संबंध फिर से पटरी पर लौट सकेंगे।