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पीएम मोदी 11 जनवरी को सोमनाथ मंदिर जाएंगे

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का उत्सव एक साल तक चलेगा

  • प्रथम आक्रमण के हजार साल पूरे हुए

  • आठ से 11 तक होंगे मुख्य कार्यक्रम

  • अपने ब्लॉग पोस्ट में जानकारी दी

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आगामी 11 जनवरी को गुजरात के गिर सोमनाथ जिले में स्थित विश्व प्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर का आधिकारिक दौरा करेंगे। नई दिल्ली में सोमवार को अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री की यह यात्रा केवल एक धार्मिक दर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के एक भव्य आयोजन का हिस्सा है। केंद्र और राज्य सरकार के सहयोग से सोमनाथ न्यास ने इस पर्व के उपलक्ष्य में साल भर चलने वाली विभिन्न सांस्कृतिक और राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत गतिविधियों की एक विस्तृत रूपरेखा तैयार की है।

अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि सोमनाथ में 8 जनवरी से लेकर 11 जनवरी तक कार्यक्रमों की एक विशेष श्रृंखला आयोजित की जाएगी। इन चार दिनों के भीतर क्षेत्र में कई उच्च स्तरीय आध्यात्मिक प्रवचन, वैदिक अनुष्ठान और महत्वपूर्ण सामाजिक कार्यों का आयोजन किया जाएगा, जिनमें देश-विदेश से श्रद्धालुओं और गणमान्य व्यक्तियों के जुटने की संभावना है। प्रशासन इस आयोजन को भव्य बनाने के लिए व्यापक सुरक्षा और बुनियादी ढांचे की तैयारी में जुटा है।

प्रधानमंत्री मोदी का सोमनाथ मंदिर से गहरा भावनात्मक और वैचारिक जुड़ाव रहा है। सोमनाथ मंदिर पर हुए पहले बड़े विदेशी आक्रमण के 1,000 वर्ष पूरे होने के ऐतिहासिक अवसर पर लिखे गए एक विशेष ब्लॉग पोस्ट में, प्रधानमंत्री ने इस तीर्थस्थल के पुनरुत्थान की गाथा को विस्तार से साझा किया है। उन्होंने सोमनाथ को भारतीय सभ्यता की उस अदम्य भावना का जीता-जागता प्रतीक बताया है, जिसने सदियों के दमन और बर्बर हमलों को सहन करने के बाद भी अपनी अस्मिता को अक्षुण्ण रखा।

अपने लेख में पीएम मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि सोमनाथ केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि भारत के आत्मविश्वास का परिचायक है। उन्होंने लिखा कि इतिहास में बार-बार विदेशी आक्रांताओं द्वारा इसे ध्वस्त करने के प्रयासों के बावजूद, यह हर बार पहले से अधिक भव्यता के साथ खड़ा हुआ है।

प्रधानमंत्री के अनुसार, संघर्षों और कठिन परिस्थितियों पर विजय प्राप्त कर समुद्र तट पर शान से खड़ा यह ज्योतिर्लिंग हमारी सभ्यता की अटूट निरंतरता और जीवंतता की सबसे बड़ी मिसाल है। 11 जनवरी का उनका यह दौरा इसी गौरवशाली विरासत को सम्मानित करने और स्वाभिमान पर्व के माध्यम से राष्ट्र की एकता का संदेश देने का एक प्रयास है।