Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
नसों में जमी गंदगी को साफ कर देंगे ये 5 देसी नुस्खे, आज से ही डाइट में करें शामिल हथेली का यह काला तिल बना सकता है आपको करोड़पति, जानें क्या कहता है आपका भाग्य ईरान में मौत का साया: खामेनेई सरकार ने प्रदर्शनकारियों को दी फांसी की धमकी, खूनी संघर्ष जारी भारतीय कानून के आगे झुका X: ग्रोक की गलती सुधारी, 600+ विवादित अकाउंट्स पर गिरी गाज गुजरात में हिल्सा की अप्रत्याशित बहार टीएमसी के आक्रामक तेवर से अब भयभीत है ईडी क्या बंगाल की खाड़ी में बन रहा है 2026 का पहला चक्रवात हमने भाजपा के लिए भी काम किया है:  प्रतीक जैन भारत ने वाणिज्य सचिव के बयान का खंडन किया तालिबान राजनयिक ने दिल्ली में संभाली कमान

अमेरिका की कार्रवाई का चीन ने कड़ा विरोध किया

मादुरो को तुरंत रिहा करने की मांग की

बीजिंग: वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी की अमेरिकी हिरासत में गिरफ्तारी पर चीन ने कड़ा रुख अपनाया है। बीजिंग के विदेश मंत्रालय ने रविवार को अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर एक बयान जारी कर अमेरिका से मादुरो और उनकी पत्नी को तत्काल रिहा करने की मांग की।

चीन ने जोर देकर कहा कि वेनेजुएला की मौजूदा स्थिति का समाधान सैन्य हस्तक्षेप से नहीं, बल्कि बातचीत और कूटनीति के माध्यम से होना चाहिए। चीन का तर्क है कि अमेरिका द्वारा किया गया यह सैन्य अभियान और निर्वाचित राष्ट्राध्यक्ष को हिरासत में लेना अंतर्राष्ट्रीय कानून और स्थापित मानदंडों का स्पष्ट उल्लंघन है। चीनी विदेश मंत्रालय ने इस कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए इसे एक संप्रभु राष्ट्र वेनेजुएला के आंतरिक मामलों में घोर हस्तक्षेप बताया।

बयान में स्पष्ट रूप से कहा गया है, चीन अमेरिका से राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी की व्यक्तिगत सुरक्षा सुनिश्चित करने, उन्हें तुरंत रिहा करने और वेनेजुएला की वैध सरकार को गिराने के सभी प्रयासों को तत्काल बंद करने का आह्वान करता है। बीजिंग ने इस सैन्य हमले को वैश्विक स्थिरता के लिए एक खतरनाक मिसाल करार दिया है।

चीन लंबे समय से यह मानता रहा है कि किसी भी देश की सत्ता का परिवर्तन केवल वहां की जनता की इच्छा और संवैधानिक प्रक्रियाओं के माध्यम से होना चाहिए, न कि किसी बाहरी सैन्य हस्तक्षेप या बल प्रयोग से। चीन और वेनेजुएला के बीच दशकों पुराना मजबूत आर्थिक और राजनीतिक गठबंधन रहा है। चीन ने वेनेजुएला को भारी ऋण दिया है और वहां के तेल संसाधनों में निवेश किया है, जिससे दोनों देशों के हित गहराई से जुड़े हुए हैं।

यह घटना ऐसे समय में हुई है जब वाशिंगटन और बीजिंग के बीच पहले से ही व्यापार, मानवाधिकार और ताइवान जैसे मुद्दों को लेकर तनावपूर्ण संबंध हैं। मादुरो की गिरफ्तारी ने इन तनावों में एक नया अध्याय जोड़ दिया है।

चीन की यह कड़ी प्रतिक्रिया दर्शाती है कि वह अमेरिका की एकतरफा कार्रवाइयों का वैश्विक मंच पर खुलकर विरोध करेगा, जिससे संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कूटनीतिक रस्साकशी तेज होने की संभावना है। चीन, रूस और उत्तर कोरिया जैसे देश अमेरिकी हस्तक्षेप के खिलाफ एक प्रभावी गठबंधन बना सकते हैं, जिससे विश्व में शक्ति संतुलन पर गहरा असर पड़ सकता है।

वेनेजुएला में अमेरिकी हस्तक्षेप ने अंतरराष्ट्रीय संबंधों में एक नया मोड़ ला दिया है। चीन की प्रतिक्रिया न केवल वेनेजुएला के प्रति उसके समर्थन को दर्शाती है, बल्कि यह भी संकेत देती है कि वह अमेरिका की वैश्विक प्रभुत्व वाली नीति को चुनौती देने के लिए तैयार है। यह घटना भविष्य में अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बड़े बदलावों की नींव रख सकती है।