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संदेशखाली में फिर से पुलिस पर हमला

टीएमसी नेता के घर छापामारी के दौरान लोगों का हमला

राष्ट्रीय खबर

कोलकाताः पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले का संदेशखाली इलाका एक बार फिर रक्तरंजित संघर्ष और भारी हिंसा का गवाह बना है। शुक्रवार की देर रात हुई इस घटना ने राज्य की कानून-व्यवस्था और पुलिस की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब राज्य पुलिस की एक विशेष टीम स्थानीय तृणमूल कांग्रेस नेता मूसा मोल्ला के घर पर छापेमारी करने पहुँची थी। मूसा मोल्ला पर आरोप है कि उन्होंने मत्स्य पालन के व्यवसाय के लिए इलाके के कई जल निकायों और तालाबों पर जबरन कब्जा कर रखा है।

जैसे ही पुलिस टीम ने कानूनी कार्रवाई करते हुए मूसा मोल्ला को हिरासत में लिया और उन्हें नजत पुलिस स्टेशन के अंतर्गत आने वाली एक पुलिस चौकी पर ले जाने के लिए गाड़ी में बिठाया, वहां मौजूद ग्रामीणों और समर्थकों की भारी भीड़ उग्र हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, भीड़ ने अचानक पुलिस टीम को चारों तरफ से घेर लिया और उन पर अंधाधुंध पथराव शुरू कर दिया।

इस अचानक हुए हमले में ड्यूटी पर तैनात छह पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए। प्रदर्शनकारियों का गुस्सा यहीं नहीं थमा; उन्होंने पुलिस के कई वाहनों में तोड़फोड़ की और उन्हें बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया। घायलों में एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी शामिल हैं, जिन्हें तत्काल स्थानीय अस्पताल ले जाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई है, लेकिन इलाके में तनाव बरकरार है।

घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की और हमले के सिलसिले में अब तक नौ लोगों को गिरफ्तार किया है। इसके अलावा, टीएमसी के नियंत्रण वाले बोयेरमारी ग्रामीण निकाय के पंचायत प्रधान और उप-प्रधान को भी हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।

पुलिस को संदेह है कि भीड़ को उकसाने और हमले की योजना बनाने में स्थानीय नेतृत्व की भूमिका हो सकती है। यह घटना ठीक दो साल पहले 5 जनवरी 2024 को संदेशखाली में ही प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम पर हुए हमले की याद दिलाती है। उस समय राशन घोटाले की जांच करने पहुँचे केंद्रीय अधिकारियों पर शाहजहाँ शेख के समर्थकों ने हमला किया था।

राजनीतिक रूप से इस घटना ने बंगाल की राजनीति को फिर गरमा दिया है। भाजपा नेता सजल घोष ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह हमला सत्तारूढ़ दल के कार्यकर्ताओं के बढ़ते दुस्साहस का प्रमाण है, जिन्हें प्रशासन का कोई डर नहीं है। दूसरी ओर, टीएमसी प्रवक्ता अरूप चक्रवर्ती ने कहा कि उनकी पार्टी हिंसा के किसी भी रूप का समर्थन नहीं करती और पुलिस की कानूनी कार्रवाई में पूरा सहयोग करेगी। भारत-बांग्लादेश सीमा के करीब स्थित होने के कारण संदेशखाली का यह क्षेत्र सामरिक और राजनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील है, जहाँ अक्सर वर्चस्व की लड़ाई हिंसा का रूप ले लेती है।