बांग्लादेश में भीड़ हिंसा की स्थिति पर गंभीर चिंता
ढाकाः बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद बनी डॉ. मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के कार्यकाल में मब वायलेंस यानी भीड़ द्वारा की जाने वाली हिंसा ने भयावह रूप ले लिया है। मानवाधिकार संगठन आइन ओ सालिश केंद्र की हालिया रिपोर्ट ने देश में कानून-व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि अगस्त 2024 से दिसंबर 2025 के बीच मब लिंचिंग की घटनाओं में आश्चर्यजनक वृद्धि हुई है। इस दौरान कम से कम 293 लोग भीड़ की सनक और हिंसा का शिकार होकर अपनी जान गंवा चुके हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, अकेले वर्ष 2025 में ही जनवरी से दिसंबर के बीच 197 लोगों को पीट-पीटकर मार डाला गया, जबकि 2024 में यह आंकड़ा 128 था। सबसे ज्यादा मौतें राजधानी ढाका (27) में हुई हैं, जो यह दर्शाता है कि कानून का खौफ शहरी इलाकों में भी खत्म हो चुका है। हाल ही में मैमनसिंह में दीपू दास नामक व्यक्ति की सरेआम हत्या और उसके बाद हुए अमानवीय व्यवहार ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि अधिकतर मामलों में बिना किसी जांच या सबूत के, केवल संदेह और अफवाह के आधार पर लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया।
भीड़ की यह हिंसा केवल हत्याओं तक सीमित नहीं है। असामाजिक तत्वों ने भीड़ बनाकर सांस्कृतिक केंद्रों, बाऊल समुदायों और यहां तक कि कब्रिस्तानों पर भी हमले किए हैं। रिपोर्ट में अल्पसंख्यकों, विशेषकर हिंदू समुदाय पर हुए 42 हमलों का भी जिक्र है, जिसमें मंदिरों में तोड़फोड़ और संपत्तियों पर कब्जे की घटनाएं शामिल हैं।
इसके अलावा, बंगबंधु स्मृति संग्रहालय में हुई तोड़फोड़ को बांग्लादेश की राष्ट्रीय पहचान और मुक्ति संग्राम की स्मृतियों का अपमान बताया गया है। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का आरोप है कि प्रशासन इन घटनाओं को रोकने में या तो अक्षम है या जानबूझकर निष्क्रिय बना हुआ है। यदि सरकार ने जल्द ही इन ‘मब’ ताकतों पर लगाम नहीं लगाई, तो देश में अराजकता का माहौल और गहरा सकता है।