बिना कुछ बोले ही पुतिन ने पूरे यूरोप को चेतावनी दी
मॉस्को: रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के बीच क्रेमलिन ने अपनी सैन्य शक्ति का प्रदर्शन करते हुए दुनिया को चौंका दिया है। रूस ने मंगलवार को आधिकारिक तौर पर एक वीडियो जारी किया, जिसमें उसकी सबसे घातक और आधुनिक ओरेश्निक मिसाइल प्रणाली को बेलारूस के गुप्त सैन्य ठिकानों पर तैनात होते हुए दिखाया गया है। परमाणु क्षमता से लैस यह हाइपरसोनिक मिसाइल रूस की सामरिक रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जा रही है।
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इस तैनाती पर गर्व जताते हुए पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि ओरेश्निक को दुनिया का कोई भी मौजूदा एयर डिफेंस सिस्टम नहीं रोक सकता। इसकी गति ध्वनि की गति से 10 गुना से भी अधिक है, जो इसे पलक झपकते ही लक्ष्य को भेदने में सक्षम बनाती है। बेलारूस में इसकी मौजूदगी विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि इसकी सीमाएं यूक्रेन के अलावा नाटो सदस्य देशों—पोलैंड, लिथुआनिया और लातविया से सटी हुई हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बेलारूस से इन मिसाइलों के प्रक्षेपण का अर्थ है कि मास्को अब पूरे यूरोप को सीधे तौर पर और बहुत कम समय में निशाना बना सकता है।
जारी किए गए फुटेज में देखा जा सकता है कि मोबाइल मिसाइल लॉन्चर घने जंगली रास्तों से गुजर रहे हैं, जिन्हें रूसी और बेलारूसी सैनिकों द्वारा विशेष सैन्य जालियों से छिपाया जा रहा है। एक वरिष्ठ रूसी सैन्य अधिकारी ने वीडियो में घोषणा की कि यह प्रणाली अब आधिकारिक तौर पर कॉम्बैट ड्यूटी (युद्ध ड्यूटी) पर तैनात कर दी गई है। इस मिसाइल की मारक क्षमता 5,500 किलोमीटर तक है। इसका तकनीकी अर्थ यह है कि रूस अपनी या बेलारूस की धरती से समूचे यूरोप के अलावा पश्चिमी संयुक्त राज्य अमेरिका के हिस्सों तक पहुँच सकता है।
यह तैनाती तब हुई है जब पश्चिमी देशों ने यूक्रेन को रूस के भीतर हमले करने के लिए लंबी दूरी की मिसाइलों के इस्तेमाल की अनुमति दी है। रूस का यह कदम नाटो देशों के लिए एक सख्त चेतावनी माना जा रहा है। पुतिन का दावा है कि ओरेश्निक की विनाशकारी शक्ति परमाणु हथियार के बराबर है, भले ही इसमें गैर-परमाणु (पारंपरिक) वारहेड का इस्तेमाल किया जाए। हालांकि, अमेरिकी रक्षा विभाग ने इस मिसाइल को गेम-चेंजर मानने से इनकार किया है, लेकिन बेलारूसी राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको की पुतिन के साथ बढ़ती सैन्य निकटता ने पश्चिम की चिंताएं निश्चित रूप से बढ़ा दी हैं। यह तैनाती वैश्विक शक्ति संतुलन में बदलाव और भविष्य के संभावित बड़े संघर्ष का स्पष्ट संकेत दे रही है।