तंजानिया के ग्रामीण इलाकों में बच्चों का भविष्य गढ़ा जा रहा
डोडोमाः तंजानिया के ग्रामीण इलाकों में सूरज शाम 7 बजे ढल जाता है, जिसके बाद बिजली के अभाव में बच्चों के लिए पढ़ाई करना मुश्किल हो जाता है। अरुषा के रहने वाले इनोसेंट जेम्स ने बचपन में इस कठिनाई को झेला था, जब उन्हें मिट्टी के तेल के लैंप की मद्धम रोशनी में पढ़ना पड़ता था। आज 33 वर्षीय जेम्स की कंपनी सोमा बैग्स (पढ़ने वाले बैग) इस समस्या का एक अभिनव समाधान प्रदान कर रही है। वे ऐसे स्कूल बैग बना रहे हैं जिनमें सोलर पैनल लगे होते हैं, जो दिन में स्कूल जाते समय चार्ज होते हैं और रात में पढ़ने के लिए लाइट जलाते हैं।
जेम्स ने इस परियोजना की शुरुआत पुराने सीमेंट के बोरों, एक सिलाई मशीन और एक सोलर पैनल से की थी। आज यह एक बड़े व्यवसाय में बदल चुका है। पिछले साल सोमा बैग्स ने पूरे अफ्रीका में 36,000 सोलर बैकपैक बेचे। तंजानिया के ग्रामीण क्षेत्रों में केवल एक-तिहाई घरों में बिजली है। मिट्टी के तेल के लैंप न केवल महंगे हैं, बल्कि वे धुआं छोड़ते हैं और उनमें आग लगने का खतरा भी रहता है। जेम्स का सोलर बैग लगभग 4 से 8 डॉलर के बीच आता है, जो कुछ ही दिनों के केरोसिन खर्च के बराबर है। एक बार पूरा चार्ज होने पर यह लाइट 6 से 8 घंटे तक चल सकती है।
अब यह कंपनी केवल बैग ही नहीं बना रही, बल्कि कचरे के प्रबंधन में भी मदद कर रही है। ये बैग सड़कों पर फेंके गए पुराने सीमेंट के बोरों से बनाए जाते हैं, जो टिकाऊ और हल्के होते हैं। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम भी इस पहल का समर्थन कर रहा है। जेम्स की कंपनी में अब 65 कर्मचारी काम करते हैं और उनके ग्राहक केवल तंजानिया तक सीमित नहीं हैं; नाइजीरिया, रवांडा और मेडागास्कर जैसे देशों में भी ये बैग भेजे जा रहे हैं। बड़े बैगों में अब फोन चार्ज करने की सुविधा भी दी जा रही है, जो गरीबी के चक्र को तोड़ने और शिक्षा को सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।