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सस्पेंशन का खौफ या अफसरों की प्रताड़ना? जालौन के शिक्षक की खुदकुशी ने खोली शिक्षा विभाग की पोल

उत्तर प्रदेश के जालौन से दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है. यहां गोपालपुरा स्थित केपीएस जूनियर हाई स्कूल में तैनात एक टीचर ने अपनी ही लाइसेंसी बंदूक से खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली. मृतक की पहचान 55 वर्षीय अनुरुद्ध पाल के रूप में हुई है. वहीं, मौके पर पुलिस पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया.

जानकारी मिलते ही परिजन उन्हें आनन-फानन में इलाज के लिए उरई के राजकीय मेडिकल कॉलेज ले जा रहे थे, लेकिन दुर्भाग्यवश रास्ते में ही उनकी मौत हो गई. जैसे ही यह खबर परिवार को मिली, घर में कोहराम मच गया और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया. यह घटना 29 दिसंबर 2025 की सुबह लगभग 10 बजे की बताई जा रही है.

मृतक के छोटे भाई ने स्कूल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए

घटना की सूचना पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे. पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और आत्महत्या के कारणों की गहन जांच शुरू कर दी है. मृतक के छोटे भाई महेश पाल ने स्कूल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने बताया कि उनके बड़े भाई को पिछले चार-पांच वर्षों से स्कूल के तीन लोग लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे थे.

आरोप है कि बीते दो वर्षों से टीचर को न तो पूरा वेतन दिया जा रहा था और न ही अन्य सुविधाएं मिल रही थीं. अनुरुद्ध पाल स्कूल के सबसे वरिष्ठ शिक्षक थे, इस कारण उनका वेतन अपेक्षाकृत अधिक था. महेश पाल का कहना है कि उनसे हर महीने 10 से 20 हजार रुपये की अवैध मांग की जाती थी और पैसे न देने पर वेतन रोक दिया जाता था. इसी उत्पीड़न से तंग आकर उनके भाई ने कोर्ट में एक मुकदमा भी दायर किया था.

मृतक के भाई ने यह भी आरोप लगाया कि स्कूल के प्रधानाध्यापक बृजेंद्र सिंह सेंगर द्वारा उन्हें लगातार परेशान किया जा रहा था. वहीं, मृतक के पुत्र बृजेंद्र प्रताप ने बताया कि उनके पिता पिछले करीब एक साल से लगातार मानसिक तनाव में थे. उन्होंने कई बार परिवार को स्कूल प्रबंधन द्वारा वेतन रोके जाने और पैसों की मांग किए जाने की बात बताई थी. परिवार ने उन्हें धैर्य रखने की सलाह दी, लेकिन प्रताड़ना कम होने के बजाय लगातार बढ़ती गई, जिससे टूटकर उन्होंने यह आत्मघाती कदम उठा लिया.

क्या बोले अधिकारी?

इस पूरे मामले पर बेसिक शिक्षा अधिकारी चंद्र प्रकाश ने कहा कि अप्रैल माह से शिक्षक को नियमित वेतन दिया जा रहा था. उन्होंने बताया कि अनुरुद्ध पाल को एक वर्ष पहले निलंबित किया गया था और निलंबन अवधि के वेतन को लेकर दिए गए प्रार्थनापत्र की जांच खंड शिक्षा अधिकारी द्वारा की गई थी. यदि जांच में लापरवाही या जानबूझकर परेशान किए जाने की बात सामने आती है और प्रबंधन दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.

वहीं माधौगढ़ कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक विकेश बाबू ने बताया कि लाइसेंसी राइफल से गोली लगने से शिक्षक की मौत हुई है. परिवार की ओर से स्कूल प्रबंधन पर प्रताड़ना के आरोप लगाए गए हैं. मामले की जांच की जा रही है और तहरीर मिलने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी.