बलरामपुर: प्रतापपुर वाड्रफनगर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते के कथित फर्जी जाति प्रमाणपत्र मामले की सुनवाई आज (29 दिसंबर) होने वाली थी. कर्मचारियों की हड़ताल के कारण जिला स्तरीय सत्यापन समिति के सदस्य उपस्थित नहीं हो सके. इसलिए सुनवाई टाल दी गई. अब अगली सुनवाई की तारीख 29 जनवरी 2026 रखी गई है.
विधायक की ओर से पैरवी: विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते के वकील बृजेंद्र पाठक ने बताया कि प्रारंभिक आपत्ति पहले ही प्रस्तुत की जा चुकी है. आज उस पर तर्क होना था, लेकिन कर्मचारियों की हड़ताल के कारण समिति के सदस्य उपस्थित नहीं थे.
आदिवासी समाज की चिंता: सर्व आदिवासी समाज के वकील जे.पी. श्रीवास्तव ने कहा कि जाति प्रमाणपत्र विवाद से जुड़े मामलों में हाईकोर्ट ने 30 दिन के भीतर निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं. उन्होंने बताया कि विधायक का प्रमाणपत्र पति के आधार पर बनाया गया है, जबकि कानूनन जाति प्रमाणपत्र पिता के नाम से बनता है. यदि पात्रता नहीं रखने वाले लोग अनुसूचित जनजाति में शामिल हो जाएंगे, तो वास्तविक आदिवासी समुदाय के अधिकार खतरे में पड़ सकते हैं.
आंदोलन की चेतावनी: अनुसूचित जनजाति आयोग के पूर्व अध्यक्ष भानु प्रताप सिंह ने कहा कि अगर 29 जनवरी को संतोषजनक निर्णय नहीं मिला, तो आदिवासी समाज उग्र आंदोलन करेगा.
पहले भी टली थी सुनवाई: बीते 11 दिसंबर को भी सुनवाई को टाल दिया गया था. लगातार टलते फैसलों के कारण जिले में तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है. अब सभी की निगाहें 29 जनवरी 2026 की सुनवाई और संभावित निर्णय पर टिकी हैं.