जलवायु परिवर्तन का असली खतरा समुद्रों से आ रहा
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तूफानों का जोर बढ़ता जा रहा है
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समुद्र के अंदर से तैयार होते हैं
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श्रेणी विभाजन को बढ़ाने की दलील
राष्ट्रीय खबर
रांचीः उत्तरी अटलांटिक और पश्चिमी प्रशांत महासागर के वे क्षेत्र जो दुनिया के सबसे शक्तिशाली तूफानों (हुर्रिकन और टाइफून) को ऊर्जा देते हैं, तेजी से गर्म हो रहे हैं। यह बदलाव न केवल समुद्र की ऊपरी सतह के गर्म होने से हो रहा है, बल्कि अब गर्मी समुद्र की गहराई तक पहुँच चुकी है। नए शोध के अनुसार, इन हॉट स्पॉट्स (तूफान बनाने वाले गर्म क्षेत्र) के विस्तार में 70 फीसद तक योगदान मानव-जनित जलवायु परिवर्तन का है। जैसे-जैसे ये गर्म क्षेत्र बढ़ रहे हैं, श्रेणी 6 कहे जाने वाले अत्यंत तीव्र उष्णकटिबंधीय चक्रवातों के घनी आबादी वाले तटीय क्षेत्रों से टकराने की आशंका बढ़ गई है। नेशनल ताइवान यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर इ-इ लिन ने न्यू ऑरलियन्स में आयोजित एजीयू 2025 वार्षिक बैठक में बताया कि इन हॉट स्पॉट्स का दायरा काफी बढ़ चुका है।
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प्रोफेसर लिन पिछले दस वर्षों से चरम तूफानों का अध्ययन कर रही हैं। साल 2013 में फिलीपींस में आए टाइफून हैयान की तबाही के बाद उनके शोध में तेजी आई। लिन और उनके साथियों का तर्क है कि अब तूफानों की तीव्रता इतनी बढ़ गई है कि उन्हें वर्गीकृत करने के लिए श्रेणी 6 की आवश्यकता है। उनके प्रस्ताव के अनुसार, जिन तूफानों की हवा की गति 160 नॉट्स से अधिक हो, उन्हें श्रेणी 6 में रखा जाना चाहिए। वर्तमान में, 137 नॉट्स से ऊपर के सभी तूफानों को श्रेणी 5 में रखा जाता है। लिन के अनुसार, चूंकि अन्य श्रेणियों के बीच लगभग 20 नॉट्स का अंतर होता है, इसलिए श्रेणी 6 बनाना वैज्ञानिक रूप से अधिक सटीक होगा।
प्रस्तावित श्रेणी 6 में कई ऐतिहासिक तूफान शामिल हो सकते हैं। जैसे हुर्रिकन विल्मा (2005): अटलांटिक बेसिन का सबसे तीव्र तूफान। टाइफून हैयान (2013) और टाइफून हागिबिस (2019): जिन्होंने भारी तबाही मचाई। हुर्रिकन पैट्रिसिया: इसे अब तक का सबसे शक्तिशाली तूफान माना जाता है, जिसकी हवा की गति 185 नॉट्स तक पहुँच गई थी। लिन के अनुसार, यह श्रेणी 7 के योग्य था। आंकड़ों के अनुसार, पिछले 40 वर्षों में ऐसे 18 तूफान आए हैं, जिनमें से आधे से अधिक पिछले केवल एक दशक में आए हैं।
इन हॉट स्पॉट्स की विशेषता यह है कि यहाँ गर्मी केवल सतह पर नहीं, बल्कि गहराई तक समाई हुई है। सामान्यतः, तूफान समुद्र की गहराई से ठंडे पानी को ऊपर लाते हैं जिससे उनकी शक्ति कम हो जाती है। लेकिन इन क्षेत्रों में गहराई तक गर्म पानी होने के कारण तूफान ठंडे नहीं हो पाते और उनकी ताकत बढ़ती जाती है।
शोध बताते हैं कि इन क्षेत्रों के विस्तार के पीछे 60-70 प्रतिशत हाथ जलवायु परिवर्तन का है। प्रोफेसर लिन का मानना है कि श्रेणी 6 को आधिकारिक मान्यता देने से सरकारों और समुदायों को भविष्य की आपदाओं के लिए बेहतर तैयारी करने में मदद मिलेगी।
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