Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
परिमल नथवाणी का आना महज राजनीति नहीं मानिए क्वांटम प्रयोग में परमाणु उल्टा घूमता देखा गया स्थानीय स्तर पर झड़पों में 25 नागा महिला घायल भूपेंद्र यादव के घऱ जुटे थे टीएमसी के सांसद फिलीपींस के मिंडानाओ में 7.8 तीव्रता का भूकंप Mamata Banerjee Silence: क्या इंडिया गठबंधन में कमजोर हुई ममता की पकड़? प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिखीं 'न... टीएमसी सांसद सुखेंदु शेखर राय ने पार्टी छोड़ी Srinagar Crime News: ड्रग तस्करों पर श्रीनगर पुलिस का बड़ा प्रहार; ₹4 करोड़ की अवैध संपत्ति की गई जब्... सीमा पार ड्रग सिंडिकेट से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जांच Delhi Airport News: दिल्ली एयरपोर्ट पर बड़ा हादसा; तेज हवाओं के कारण एयर इंडिया के 3 विमान क्षतिग्रस्...

किमबर्ले प्रोसेस में भारत का उदय और हीरा कूटनीति

हीरों के कारोबार की शीर्ष संगठन में भारत को पगड़ी

केप टाउनः वैश्विक अर्थव्यवस्था और रणनीतिक व्यापार के क्षेत्र में भारत ने एक ऐतिहासिक मुकाम हासिल किया है। दुनिया भर में कच्चे हीरों के अवैध व्यापार और उनसे होने वाली हिंसा को रोकने वाली सर्वोच्च संस्था किमबर्ले प्रोसेस ने भारत को आगामी वर्ष 2026 के लिए अपना अध्यक्ष नियुक्त किया है।

इसके साथ ही, भारत 2025 में उपाध्यक्ष की भूमिका निभाएगा। यह घोषणा भारत के लिए केवल एक पद नहीं, बल्कि वैश्विक हीरा उद्योग की सप्लाई चेन पर उसकी पकड़ और नैतिक व्यापार के प्रति उसकी साख का सम्मान है। सूरत और मुंबई जैसे केंद्रों के माध्यम से भारत दुनिया के अधिकांश हीरों की फिनिशिंग करता है, और अब वह इस उद्योग के नियम भी तय करेगा।

भारत की अध्यक्षता का कार्यकाल ऐसे समय में आ रहा है जब सिंथेटिक हीरों और हीरों की उत्पत्ति की पहचान को लेकर दुनिया भर में बहस छिड़ी हुई है। वाणिज्य मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, भारत का मुख्य उद्देश्य किमबर्ले प्रोसेस के ढांचे को आधुनिक बनाना होगा। भारत ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी के उपयोग का प्रस्ताव रख रहा है ताकि खदान से लेकर उपभोक्ता की उंगली तक पहुँचने वाले हर हीरे का डिजिटल रिकॉर्ड रखा जा सके। इससे यह सुनिश्चित होगा कि कोई भी ब्लड डायमंड (रक्त हीरा) वैध बाजार में प्रवेश न कर पाए।

यह उपलब्धि भारतीय कूटनीति के लिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि किमबर्ले प्रोसेस में 85 से अधिक देश शामिल हैं। भारत की इस भूमिका से अफ्रीकी हीरा उत्पादक देशों और पश्चिमी उपभोक्ता देशों के बीच एक सेतु बनेगा। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि इस अध्यक्षता से भारतीय निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर अधिक मोलभाव की शक्ति मिलेगी और मेक इन इंडिया ब्रांड के तहत तराशे गए हीरों की मांग वैश्विक स्तर पर बढ़ेगा। यह वैश्विक मंच पर भारत के बढ़ते प्रभाव का एक और जीवंत उदाहरण है।