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चुनाव के लिए एक साथ आये ठाकरे बंधु

मुंबई नगर निगम चुनाव से पहले राजनीतिक फेरबदल

  • सुबह प्रेस कांफ्रेंस में किया एलान

  • 15 जनवरी को होंगे यह चुनाव

  • दिल्ली दरबार के रवैये का विरोध

राष्ट्रीय खबर

मुंबईः मुंबई की राजनीति में एक दशक बाद सबसे बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। लंबे समय से अलग रहे ठाकरे भाइयों—उद्धव और राज ठाकरे—ने फिर से हाथ मिला लिया है। दोनों चचेरे भाइयों ने आगामी मुंबई स्थानीय निकाय चुनाव मिलकर लड़ने का औपचारिक ऐलान कर दिया है। इस गठबंधन के साथ ही देश की आर्थिक राजधानी का राजनीतिक नक्शा पूरी तरह बदलने की उम्मीद है, जहाँ मराठी अस्मिता एक बार फिर क्षेत्रीय राजनीति के केंद्र में लौट आई है।

आज सुबह एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे ने घोषणा की, मैं आधिकारिक तौर पर यह घोषित करता हूँ कि 15 जनवरी को होने वाले चुनावों के लिए शिवसेना (यूबीटी) और मनसे गठबंधन के साथी हैं। उन्होंने दहाड़ते हुए विश्वास जताया कि मुंबई को मराठी मेयर ही मिलेगा और वह इसी गठबंधन से होगा।

उनके साथ बैठे उद्धव ठाकरे ने भी आत्मविश्वास के साथ कहा, मुंबई हमारे पास ही रहेगी, चाहे कुछ भी हो जाए। उद्धव ने दिल्ली की केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि मुंबई अब दिल्ली के शासकों की आँखों की किरकिरी बन गई है, इसलिए कर्तव्य की भावना से प्रेरित होकर ठाकरे परिवार ने एकजुट होने की कसम खाई है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के चर्चित नारे बटेंगे तो कटेंगे पर प्रतिक्रिया देते हुए उद्धव ठाकरे ने इसे नया मोड़ दिया। उन्होंने कहा, भाजपा कहती है बटेंगे तो कटेंगे, लेकिन मैं कहता हूँ, चुकला तर संपला (अगर अब चूके तो खत्म हो जाओगे)। उन्होंने चेतावनी दी कि जो लोग मुंबई को महाराष्ट्र से अलग करने का सपना देख रहे हैं, उन्हें राजनीतिक रूप से समाप्त किए बिना हम शांत नहीं बैठेंगे।

राज ठाकरे ने भी पहचान की राजनीति को हवा देते हुए कहा कि महाराष्ट्र को अब स्थिरता की जरूरत है, क्योंकि वर्तमान में राजनीतिक दलों को हाइजैक करने वाले गिरोह सक्रिय हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह गठबंधन केवल चुनाव के लिए नहीं, बल्कि महाराष्ट्र के दीर्घकालिक हितों के लिए है। दोनों भाइयों ने भाजपा-शिंदे गठबंधन से नाराज नेताओं को भी अपने साथ आने का न्योता दिया।