गाजा में शांति की नई किरण
रियाधः मध्य पूर्व में पिछले कई महीनों से जारी विनाशकारी संघर्ष के बीच अब एक महत्वपूर्ण और सकारात्मक बदलाव की उम्मीद जगी है। मिस्र और कतर, जो इस पूरे संकट के दौरान प्रमुख शांतिदूतों और मध्यस्थों की भूमिका निभा रहे हैं, ने इजरायल और हमास के बीच एक नए 30 दिवसीय मानवीय युद्धविराम का विस्तृत प्रस्ताव रखा है।
यह प्रस्ताव उस समय आया है जब गाजा पट्टी में मानवीय स्थिति बेहद चिंताजनक स्तर पर पहुँच चुकी है और इजरायल के भीतर भी बंधकों की सुरक्षित वापसी के लिए सरकार पर घरेलू दबाव लगातार बढ़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस पहल को एक ऐसी खिड़की के रूप में देखा जा रहा है जो भविष्य में स्थायी शांति का मार्ग प्रशस्त कर सकती है।
इस प्रस्तावित समझौते के मुख्य बिंदुओं में इजरायली जेलों में बंद फिलिस्तीनी कैदियों की रिहाई के बदले हमास के कब्जे में मौजूद बंधकों की सुरक्षित घर वापसी शामिल है। इसके अलावा, इस 30 दिनों की अवधि के दौरान गाजा में युद्ध की तीव्रता को पूरी तरह से थामने का सुझाव दिया गया है ताकि बड़े पैमाने पर भोजन, पानी, ईंधन और चिकित्सा आपूर्ति सुलभ कराई जा सके।
वर्तमान में गाजा के अधिकांश अस्पताल मलबे में तब्दील हो चुके हैं और भुखमरी की स्थिति चरम पर है। सूत्रों के अनुसार, हमास ने इस प्रस्ताव पर सैद्धांतिक सहमति के संकेत दिए हैं, हालांकि उन्होंने शर्त रखी है कि इजरायली सेना को प्रमुख नागरिक केंद्रों और रणनीतिक गलियारों से पीछे हटना होगा।
दूसरी ओर, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के प्रशासन के लिए यह प्रस्ताव एक कठिन कूटनीतिक परीक्षा की तरह है। एक तरफ कट्टरपंथी सहयोगियों का दबाव है कि सैन्य अभियान जारी रहे, वहीं दूसरी तरफ बंधकों के परिवारों ने तेल अवीव की सड़कों पर प्रदर्शन कर सरकार से इस मौके को न गंवाने की अपील की है। अमेरिकी प्रशासन ने भी इस प्रस्ताव का स्वागत किया है और इसे अत्यधिक आवश्यक मानवीय राहत का जरिया बताया है। यदि यह समझौता जमीन पर उतरता है, तो यह युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक का सबसे बड़ा और व्यवस्थित युद्धविराम होगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि हालांकि यह युद्धविराम अस्थायी है, लेकिन यह दोनों पक्षों के बीच अविश्वास की खाई को पाटने का काम कर सकता है। इस दौरान अंतरराष्ट्रीय रेड क्रॉस और संयुक्त राष्ट्र को राहत कार्य करने का मौका मिलेगा, जिससे सर्दियों के इस मौसम में हजारों निर्दोषों की जान बचाई जा सकती है। दुनिया भर की निगाहें अब अगले 48 घंटों पर टिकी हैं, जब दोनों पक्षों की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया की उम्मीद है। यह केवल एक युद्धविराम नहीं, बल्कि मध्य पूर्व में शांति की दिशा में एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है।