Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन की तैयारी ममता का अल्टिमेटम: "अगर हमारे अधिकार छीने तो हम भी चैन से बैठने नहीं देंगे", ED की रेड को बताया रणनी... धामी सरकार का बड़ा फैसला! अंकिता हत्याकांड की गुत्थी अब सुलझाएगी CBI, 'VIP' के नाम से उठेगा पर्दा MP पुलिस की 'खाकी' पर खून के दाग! 5 लाख की वसूली और टॉर्चर से तंग आकर युवक ने दी जान, सुसाइड नोट में... के. लक्ष्मण संभालेंगे मोर्चा! ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नाम कटने से बढ़ी टेंशन, बीजेपी ने बनाया 'इलेक्श... दहशत में वैशाली! बीजेपी नेता के भाई की संदिग्ध मौत, कमरे का नजारा देख कांप उठी रूह; हत्या या आत्महत्... LAC और LOC पर 'अदृश्य' पहरा: सेना के बेड़े में शामिल हुआ सोलर ड्रोन, हफ्तों तक आसमान से करेगा दुश्मन... रेत माफिया पर ED का 'सर्जिकल स्ट्राइक': कई राज्यों में ताबड़तोड़ छापेमारी, मनी लॉन्ड्रिंग के पुख्ता ... ED की रेड में पुलिस का 'एक्शन': जांच एजेंसी ने कोर्ट को बताया- बंगाल में कानून का नहीं, 'दबाव' का चल... केजरीवाल ने जनता को ठगा!" मंत्री आशीष सूद का विस्फोटक दावा, बताया किन 3 वादों पर बोले गए सबसे बड़े झ...

फ्रांस के नई पीढ़ी के विमानवाहक पोत का अनावरण

हवाई क्षेत्र में कमाल के बाद अब नौसेना को मजबूती

पेरिस, फ्रांस: वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने अपनी नौसैनिक सैन्य क्षमता को नए शिखर पर ले जाने की एक महात्वाकांक्षी योजना पेश की है। मैक्रों ने आधिकारिक तौर पर फ्रांस के अगले विमानवाहक पोत के निर्माण की घोषणा की है, जो न केवल तकनीकी रूप से दुनिया के सबसे उन्नत पोतों में से एक होगा, बल्कि फ्रांस की वैश्विक संप्रभुता का प्रतीक भी बनेगा।

इस नए विमानवाहक पोत को अस्थायी रूप से पीएएनजी नाम दिया गया है। यह पोत फ्रांस के वर्तमान विमानवाहक पोत, चार्ल्स डी गॉल, की जगह लेगा। इसकी प्रमुख विशेषताएं इसे दुनिया के चुनिंदा शक्तिशाली युद्धपोतों की श्रेणी में खड़ा करती हैं। यह पोत दो शक्तिशाली के22 परमाणु रिएक्टरों द्वारा संचालित होगा।

इसका मतलब है कि इसे ईंधन भरने के लिए बार-बार बंदरगाहों पर रुकने की आवश्यकता नहीं होगी, जिससे यह महीनों तक समुद्र में तैनात रह सकता है। लगभग 75,000 टन वजन वाला यह पोत 300 मीटर से अधिक लंबा होगा। यह अपने साथ 30 से अधिक लड़ाकू विमानों (जिनमें भविष्य के एफसीएएस लड़ाकू विमान शामिल हैं), अत्याधुनिक राडार सिस्टम और उन्नत मिसाइल रक्षा प्रणाली ले जाने में सक्षम होगा। यह पोत अमेरिकी तकनीक जैसी इलेक्ट्रोमैग्नेटिक एयरक्राफ्ट लॉन्च सिस्टम से लैस होगा, जिससे भारी लड़ाकू विमानों को बहुत कम दूरी से और तेज़ी से लॉन्च किया जा सकेगा।

राष्ट्रपति मैक्रों का यह कदम उनकी रणनीतिक स्वायत्तता की नीति का हिस्सा है। मैक्रों लंबे समय से तर्क देते रहे हैं कि यूरोप को रक्षा के मामले में केवल अमेरिका या नाटो पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। फ्रांस द्वारा अपने दम पर इस तरह के विशाल पोत का निर्माण करना यह संदेश देता है कि पेरिस अपनी समुद्री सीमाओं और हितों की रक्षा करने में पूरी तरह सक्षम है। यह प्रोजेक्ट फ्रांसीसी रक्षा उद्योग (जैसे नेवल ग्रुप और डसॉल्ट) के लिए हजारों नौकरियां और तकनीकी नवाचार के अवसर पैदा करेगा।

2038 तक परिचालन में आने वाला यह पोत विशेष रूप से हिंद-प्रशांत क्षेत्र में फ्रांस की उपस्थिति को मजबूत करेगा। इस क्षेत्र में फ्रांस के कई विदेशी क्षेत्र और 15 लाख से अधिक नागरिक रहते हैं। बढ़ते चीनी प्रभाव और समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा को देखते हुए, एक शक्तिशाली विमानवाहक पोत की उपस्थिति फ्रांस को एक नेट सुरक्षा प्रदाता (Net Security Provider) के रूप में स्थापित करेगी।

राष्ट्रपति मैक्रों की यह घोषणा फ्रांस की रक्षा नीति में एक ऐतिहासिक मोड़ है। हालांकि 2038 की समयसीमा अभी दूर लग सकती है, लेकिन इस तरह के विशाल और जटिल इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट्स के लिए दशकों की योजना और निवेश की आवश्यकता होती है। यह विमानवाहक पोत न केवल फ्रांस की नौसेना की शक्ति को दोगुना करेगा, बल्कि आने वाली आधी शताब्दी तक वैश्विक समुद्रों पर फ्रांस के दबदबे को भी सुनिश्चित करेगा।