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महाराष्ट्र में ड्रग गिरोहबंदी के मामले में शिवसेना का आरोप

शिंदे के भाई के रिसॉर्ट से खाना सप्लाई

पुणे: महाराष्ट्र की राजनीति में उस समय भूचाल आ गया जब शिवसेना (यूबीटी) ने राज्य के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के परिवार पर सीधे हमले किए। पार्टी ने आरोप लगाया है कि पुणे जिले में पकड़ी गई एक अवैध ड्रग्स निर्माण इकाई और उपमुख्यमंत्री के भाई के स्वामित्व वाले एक रिसॉर्ट के बीच संदिग्ध संबंध हैं। इन आरोपों ने राज्य में कानून-व्यवस्था और सत्ताधारी नेताओं की भूमिका पर एक नई बहस छेड़ दी है।

शिवसेना (यूबीटी) के नेताओं ने दावा किया है कि पुणे में जिस शेड के अंदर अवैध रूप से नशीली दवाएं बनाई जा रही थीं, वहां काम करने वाले मजदूरों और कर्मचारियों के लिए भोजन की व्यवस्था एक खास रिसॉर्ट से की जाती थी। जांच में यह बात सामने आई कि यह रिसॉर्ट कथित तौर पर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के भाई का है। विपक्ष का सवाल है कि क्या यह महज एक इत्तेफाक है या फिर इस अवैध धंधे को प्रभावशाली लोगों का संरक्षण प्राप्त था?

विपक्षी गठबंधन ने इस मामले में दूध का दूध और पानी का पानी करने के लिए एक निष्पक्ष और व्यापक जांच की मांग की है। पार्टी प्रवक्ताओं का कहना है कि ड्रग्स जैसा गंभीर मुद्दा युवाओं के भविष्य से जुड़ा है, इसलिए इसकी जांच में किसी भी प्रकार का राजनीतिक दबाव नहीं होना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि एक अवैध फैक्ट्री को भोजन की रसद एक हाई-प्रोफाइल रिसॉर्ट से कैसे मिल रही थी और क्या रिसॉर्ट प्रबंधन को इस संदिग्ध गतिविधि की जानकारी थी?

दूसरी ओर, सत्ताधारी दल (शिंदे गुट और भाजपा) ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। सरकार का कहना है कि विपक्ष हताशा में मुख्यमंत्री की छवि खराब करने के लिए उनके परिवार को निशाना बना रहा है। इसे पूरी तरह राजनीति से प्रेरित बताया जा रहा है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच अभी शुरुआती चरण में है और वे सभी तकनीकी एवं लॉजिस्टिक पहलुओं की बारीकी से पड़ताल कर रहे हैं।

फिलहाल रिसॉर्ट की इस पूरे रैकेट में किसी भी तरह की प्रत्यक्ष संलिप्तता की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि साक्ष्यों के आधार पर जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। महाराष्ट्र में आगामी चुनावों और राजनीतिक अस्थिरता के बीच ऐसे आरोप बेहद संवेदनशील माने जा रहे हैं। विपक्ष इस मुद्दे को जनता के बीच ले जाने की तैयारी में है, वहीं सरकार इसे निराधार बताकर कानूनी कार्रवाई की बात कर रही है।