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एकनाथ शिंदे अपने पार्षदों को बांद्रा होटल ले गये

दूसरों को झटका देने के बाद अब उस डर से हो गया सामना

  • सुरक्षा और एकजुटता का हवाला

  • महापौर चुनाव से पहले मोल भाव

  • दल बदल का डर सता रहा है उन्हें

राष्ट्रीय खबर

मुंबईः महाराष्ट्र की सत्ता पर काबिज एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना ने अपने नवनिर्वाचित पार्षदों की किलेबंदी शुरू कर दी है। हाल ही में संपन्न हुए नगर निगम चुनावों में जीत हासिल करने वाले पार्षदों को एकजुट रखने के लिए पार्टी नेतृत्व ने उन्हें बांद्रा के एक सुरक्षित होटल में ठहराने का निर्णय लिया है। राजनीतिक गलियारों में इस रणनीति को ‘रिजॉर्ट पॉलिटिक्स’ के रूप में देखा जा रहा है, जिसका उद्देश्य प्रतिद्वंद्वी दलों द्वारा पार्षदों को लुभाने या तोड़ने की किसी भी कोशिश को नाकाम करना है।

पार्टी सूत्रों के अनुसार, यह निर्णय केवल सुरक्षा के दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि आगामी महापौर चुनाव और अन्य महत्वपूर्ण पदों के लिए बहुमत सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे स्वयं इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी कर रहे हैं। पार्षदों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अगले कुछ दिनों तक पार्टी नेतृत्व के संपर्क में रहें और किसी भी बाहरी प्रभाव से दूर रहें। याद दिला दें कि कभी इसी तरह खुद एकनाथ शिंदे भी अपने विधायकों को लेकर उद्धव ठाकरे को धोखा देने में कामयाब हुए थे। उसके बाद शिंदे गुट के सभी लोग भाजपा की छत्रछाया में असम तक का सफर कर आये थे।

विपक्ष, विशेषकर उद्धव ठाकरे गुट और महा विकास अघाड़ी के घटक दल, शिंदे गुट की इस घेराबंदी पर तीखी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि शिंदे सरकार को अपने ही निर्वाचित प्रतिनिधियों पर भरोसा नहीं है। दूसरी ओर, शिंदे गुट का तर्क है कि विपक्षी दल उनके पार्षदों को गुमराह करने और अवैध रूप से संपर्क साधने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे बचने के लिए यह कदम उठाना अनिवार्य था।

होटल में ठहराए गए पार्षदों के लिए विशेष सत्र और बैठकें आयोजित की जा रही हैं, ताकि उन्हें पार्टी की भविष्य की योजनाओं और नगर निगम में कामकाज के तरीकों से अवगत कराया जा सके। यह स्पष्ट है कि मुंबई और आसपास के नगर निगमों में अपना वर्चस्व बनाए रखने के लिए मुख्यमंत्री शिंदे कोई भी जोखिम उठाने के मूड में नहीं हैं।