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फ्रांस में वेतन को लेकर राष्ट्रव्यापी हड़ताल

राष्ट्रपति मैंक्रों अब देश की बड़ी समस्या से जूझ रहे हैं

पेरिसः फ्रांस एक बार फिर बड़े पैमाने पर राष्ट्रव्यापी हड़ताल की चपेट में है, जिसे सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों के कर्मचारियों द्वारा वेतन वृद्धि और बेहतर कार्य परिस्थितियों की मांग को लेकर शुरू किया गया है। यह हड़ताल देश भर में बढ़ती महंगाई और जीवन-यापन की लागत के संकट का सीधा परिणाम है, जिससे आम फ्रांसीसी नागरिक अपनी दैनिक जरूरतों को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

कर्मचारी संघों द्वारा आहूत इस हड़ताल में शिक्षकों, स्वास्थ्य कर्मियों, रेलवे कर्मचारियों, ऊर्जा क्षेत्र के श्रमिकों और अन्य सरकारी विभागों के कर्मचारियों ने बड़े पैमाने पर हिस्सा लिया है। श्रमिकों की मुख्य मांग है कि उनके वेतन को पिछले एक साल में बढ़ी हुई महंगाई दर के अनुरूप तुरंत समायोजित किया जाए। उनका तर्क है कि उनकी वास्तविक आय लगातार घट रही है, जबकि कॉर्पोरेट मुनाफे में वृद्धि हो रही है। यूनियनें सरकार और निजी नियोक्ताओं पर दबाव डाल रही हैं कि वे श्रमिकों को एक न्यायसंगत हिस्सा प्रदान करें।

इस हड़ताल का सबसे गंभीर असर देश की परिवहन सेवाओं पर पड़ा है।  पेरिस और अन्य प्रमुख शहरों में मेट्रो, बस और राष्ट्रीय रेल सेवा (SNCF) बड़े पैमाने पर बाधित हुई हैं। कई उड़ानें रद्द कर दी गई हैं, जिससे हजारों यात्री फंसे हुए हैं और फ्रांस की अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। स्कूलों और अस्पतालों में भी कामकाज प्रभावित हुआ है, हालांकि आवश्यक सेवाएं जारी रखने के लिए न्यूनतम कर्मचारी तैनात किए गए हैं।

राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की सरकार इस स्थिति को संभालने के लिए संघर्ष कर रही है। सरकार ने शुरू में यह कहकर वेतन वृद्धि की मांगों को खारिज कर दिया था कि इससे महंगाई पर और दबाव पड़ेगा। हालांकि, हड़ताल की बढ़ती तीव्रता को देखते हुए, सरकार पर अब दबाव बढ़ गया है कि वह श्रम संघों के साथ सार्थक बातचीत शुरू करे। यह हड़ताल मैक्रों के लिए एक राजनीतिक चुनौती है, क्योंकि उनकी आर्थिक सुधार की योजनाएँ अक्सर सार्वजनिक विरोध का केंद्र रही हैं।

यह विरोध प्रदर्शन सिर्फ वेतन वृद्धि तक सीमित नहीं है, बल्कि यह फ्रांस में सामाजिक न्याय और आर्थिक असमानता पर व्यापक चिंता को भी दर्शाता है। श्रमिक महसूस करते हैं कि वे आर्थिक सुधारों का बोझ उठा रहे हैं, जबकि अमीर और बड़ी कंपनियाँ लाभ कमा रही हैं। इस राष्ट्रव्यापी कार्रवाई ने फ्रांसीसी नागरिकों की विरोध करने और सामूहिक कार्रवाई के माध्यम से अपनी मांगों को मनवाने की ऐतिहासिक प्रवृत्ति को एक बार फिर से उजागर किया है। सरकार और यूनियनों के बीच जल्द कोई समझौता न होने पर, यह हड़ताल देश की अर्थव्यवस्था और दैनिक जीवन को और अधिक दिनों तक पंगु बना सकती है।