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ईरान में बाल वधू को मिली फांसी टल गयी

रक्त धन के भुगतान से मौत की सजा से राहत

तेहरानः ईरान में न्याय प्रणाली और सामाजिक रूढ़ियों से जुड़ी एक बेहद भावनात्मक और मानवीय खबर सामने आई है। एक महिला, जिसे बाल वधू के रूप में शादी करने के बाद हत्या के एक जटिल मामले में दोषी ठहराया गया था, उसे फांसी की सज़ा से बचा लिया गया है। यह घटना ईरान की सख्त कानूनी व्यवस्था, विशेषकर बाल विवाह और न्याय में रक्त-धन की अवधारणा की भूमिका को रेखांकित करती है।

इस महिला को, जिसने कम उम्र में ही शादी कर ली थी, कथित तौर पर अपने पति की हत्या के मामले में दोषी पाया गया था। ईरान के शरिया-आधारित कानून के तहत, हत्या के दोषी व्यक्ति को आमतौर पर क़िसास (आँख के बदले आँख) के सिद्धांत के तहत फांसी की सज़ा दी जाती है।

यह नियम उन लोगों पर भी लागू होता है जो अपराध करते समय कानूनी रूप से वयस्क नहीं थे या जिन्होंने विवाहित जीवन में गंभीर दुर्व्यवहार का सामना किया था। इस मामले ने अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों का ध्यान आकर्षित किया था, जिन्होंने ईरान की न्याय प्रणाली में बाल अपराधियों को फांसी दिए जाने के चलन की कड़ी आलोचना की थी।

फांसी से राहत का यह निर्णय एक विशेष कानूनी प्रावधान के तहत संभव हुआ, जिसे दीया या रक्त-धन (ब्लड मनी) कहा जाता है। इस प्रावधान के अनुसार, पीड़ित पक्ष (इस मामले में मृतक के परिवार) को वित्तीय मुआवजा देकर अपराधी की सज़ा, विशेषकर मृत्युदंड, को माफ करने का कानूनी अधिकार होता है। महिला के समर्थन में मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, वकीलों और परोपकारी संगठनों ने मिलकर मृतक के परिवार को एक बड़ी राशि का मुआवजा (रक्त-धन) देने की व्यवस्था की।

यह समझौता मृतक के परिवार के सदस्यों की सहमति के बाद हुआ, जिन्होंने दीया स्वीकार करके महिला को फांसी की सज़ा से मुक्त करने का निर्णय लिया। हालांकि महिला की जान बच गई है, लेकिन यह घटना ईरान में बाल विवाह की भयावहता और महिलाओं पर पड़ने वाले उसके दीर्घकालिक मनोवैज्ञानिक और कानूनी प्रभावों पर गंभीर सवाल उठाती है। कई मानवाधिकार समूह लगातार मांग कर रहे हैं कि ईरान की न्यायपालिका को उन लोगों के प्रति अधिक उदारता दिखानी चाहिए जिन्होंने कम उम्र में ही विवाह और घरेलू हिंसा जैसे मुश्किल हालात का सामना किया है।

इस मामले में रक्त-धन के माध्यम से मिली राहत ने महिला को एक नया जीवन दिया है, लेकिन यह भी स्पष्ट कर दिया है कि ईरान की कानूनी प्रणाली में न्याय अक्सर वित्तीय समझौतों पर निर्भर करता है, जिससे समाज के गरीब तबके के लोगों के लिए न्याय पाना कठिन हो जाता है।