बिहार में विपक्ष को बैठे बिठाये नया मुद्दा सीएम ने दिया
राष्ट्रीय खबर
पटनाः बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक सार्वजनिक समारोह के दौरान एक महिला के हिजाब खींचने के कारण एक बड़े राजनीतिक विवाद के केंद्र में आ गए हैं। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रहा है, जिसने धर्मनिरपेक्षता और महिलाओं के सम्मान को लेकर राज्य की राजनीति में आक्रोश की लहर पैदा कर दी है।
यह घटना राजधानी पटना में एक सरकारी कौशल विकास केंद्र के उद्घाटन के दौरान हुई। वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक महिला प्रशिक्षु से बात कर रहे थे, जिसने एक स्कार्फ को हिजाब की तरह सिर पर लपेटा हुआ था। बात करते-करते अचानक मुख्यमंत्री ने महिला के सिर से वह स्कार्फ खींच लिया। महिला क्षण भर के लिए अवाक रह गई और उसने तुरंत अपने बालों को हाथ से ढँकने की कोशिश की।
इस घटना के बाद विपक्षी दलों ने मुख्यमंत्री पर हमला बोल दिया है और उन पर धार्मिक भावनाओं को आहत करने और महिला के निजी सम्मान का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। मुख्य विपक्षी दल ने इसे मुस्लिम विरोधी मानसिकता का प्रमाण बताया है और मुख्यमंत्री से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने टिप्पणी की, यह महिलाओं के प्रति, विशेष रूप से मुस्लिम महिलाओं के प्रति उनके असंवेदनशील रवैये को दर्शाता है। एक मुख्यमंत्री को क्या अधिकार है कि वह किसी के निजी पहनावे को इस तरह से स्पर्श करे?
वहीं, सत्तारूढ़ दल ने मुख्यमंत्री का बचाव किया है। उनके प्रवक्ता ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री का इरादा किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाना नहीं था। उन्होंने कहा कि महिला प्रशिक्षु का स्कार्फ संभवतः थोड़ा अव्यवस्थित था, और मुख्यमंत्री केवल पिता तुल्य स्नेह के साथ उसे ठीक करने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन यह दुर्भाग्य से गलत तरीके से प्रस्तुत हुआ। प्रवक्ता ने आगे कहा कि मुख्यमंत्री सभी धर्मों और समुदायों का सम्मान करते हैं और इस घटना को अनावश्यक रूप से राजनीतिक रंग दिया जा रहा है।
हालांकि, यह स्पष्टीकरण विपक्ष और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं को संतुष्ट करने में विफल रहा है। कई महिला अधिकार समूहों ने भी इस कृत्य की निंदा की है और इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर हमला बताया है। यह घटना बिहार में गठबंधन सरकार के लिए एक असहज स्थिति पैदा कर सकती है, क्योंकि यह ऐसे समय में हुई है जब राज्य में सांप्रदायिक सद्भाव का मुद्दा पहले से ही संवेदनशील बना हुआ है।