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देवघर में ‘अंडरग्राउंड डकैती’, जमीन के नीचे भी सुरक्षित नहीं सरकारी संपत्ति!

देवघर: जिला में अपराधियों के हौसले इस कदर बुलंद हो चुके हैं कि अब वे जमीन के ऊपर नहीं, बल्कि जमीन के नीचे बह रही सरकारी संपत्ति को भी निशाना बनाने से नहीं चूक रहे हैं. ताजा मामला रिखिया थाना क्षेत्र के मलाहारा गांव का है. जहां इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL) की हल्दिया–बरौनी अंडरग्राउंड पाइपलाइन में छेड़छाड़ कर कच्चे तेल की चोरी का सनसनीखेज खुलासा हुआ है.

जानकारी के अनुसार, पाइपलाइन में प्रवाहित हो रहे कच्चे तेल के दबाव में अचानक आई गिरावट ने IOCL के कंट्रोल रूम में बैठे अधिकारियों को सतर्क कर दिया. तकनीकी निगरानी के दौरान जब प्रेशर सामान्य से कम पाया गया तो आशंका जताई गई कि कहीं पाइपलाइन को नुकसान पहुंचाकर तेल की अवैध निकासी तो नहीं की जा रही. शक गहराते ही IOCL की टीम ने देवघर इलाके में गश्ती शुरू की.

गश्ती के दौरान मलाहारा गांव के एक सुनसान इलाके में जमीन के भीतर बिछी पाइपलाइन में अवैध रूप से वाल्व लगाए जाने का खुलासा हुआ. जांच में यह भी सामने आया कि तेल की चोरी के दौरान आसपास के क्षेत्र में कच्चे तेल का रिसाव हुआ है, जिससे पर्यावरणीय खतरे की भी आशंका बनी हुई है. सूचना मिलते ही इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन के तकनीकी पदाधिकारी मौके पर पहुंचे और तत्काल पाइपलाइन की मरम्मत तथा लीकेज रोकने का कार्य शुरू कर दिया.

बता दें कि यह कोई पहली घटना नहीं है. इससे पहले जसीडीह थाना क्षेत्र में भी जमीन के नीचे से गुजर रही पाइपलाइन को नुकसान पहुंचाकर कच्चे तेल की चोरी का मामला सामने आ चुका है, जिस पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठे थे. वहीं, कुछ दिन पूर्व सारवां थाना क्षेत्र में भी इसी तरह के मामले में कई आरोपियों की गिरफ्तारी हुई थी. लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने न केवल पुलिस की चौकसी बल्कि पाइपलाइन सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है.

IOCL के अधिकारियों ने पूरे मामले को गंभीर मानते हुए रिखिया थाना में लिखित शिकायत दर्ज कराई है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है. इस संबंध में रिखिया थाना प्रभारी प्रभात कुमार ने बताया कि इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन की ओर से आवेदन प्राप्त हुआ है और शिकायत मिलते ही पुलिस जांच में जुट गई है. संदिग्धों की पहचान और घटना में शामिल लोगों की तलाश की जा रही है.

अब तक देवघर में चोरी की वारदातें आम नागरिकों की संपत्ति तक सीमित थीं. लेकिन अब सरकारी राजस्व और राष्ट्रीय महत्व की परिसंपत्तियां भी अपराधियों के निशाने पर आ चुकी हैं. अब देखने वाली बात यह होगी कि कच्चे तेल की चोरी जैसे संगठित अपराध में शामिल आरोपियों को कब तक कानून के शिकंजे में लाकर सलाखों के पीछे भेजा जाता है, ताकि न केवल सरकारी राजस्व की क्षति रोकी जा सके बल्कि भविष्य में इस तरह की वारदातों पर भी प्रभावी अंकुश लगाया जा सके.