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गिरिडीह में दिख रही है विदेशी पक्षियों की अठखेलिया, मारने पर सात साल तक की हो सकती है सजा

गिरिडीह: ठंड की आहट के साथ ही विदेशी (प्रवासी) पक्षियों का आगमन गिरिडीह में होने लगता है. नवंबर से पक्षी आते हैं और फिर फरवरी महीने तक यहां प्रवास करते हैं. इस बार भी साइबेरिया-मंगोलिया के पक्षी यहां पहुंच चुके हैं. जिन पक्षियों का आगमन गिरिडीह में हो चुका है, उनमें ओपन मिली स्ट्रोक, गल्स, सिगल प्रमुख हैं. इन पक्षियों की अठखेलियां गिरिडीह के खंडोली जलाशय में देखने को मिल रही है. इन पक्षियों को देखने सैलानी भी लगातार पहुंच रहे हैं. ऐसे में पक्षियों की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण है.

वन विभाग पूरी तरह से सतर्क

प्रवास करने वाले पक्षियों का शिकार भी होता रहा है. शिकारी मौका मिलते ही इन विदेशी मेहमान को जिंदा नहीं छोड़ते, ऐसे में वन विभाग इस मामले को लेकर पूरी तरह से सतर्क दिख रहा है. डीएफओ मनीष तिवारी ने अलग से टीम का गठन किया है. ईटीवी भारत से बात करते हुए मनीष तिवारी ने बताते हैं कि ठंड के समय में साइबरियन पक्षी खंडोली के क्षेत्र में आते हैं. अभी उनके आने का समय है और लगभग 80 फीसदी पक्षी आ चुके हैं. जो पक्षी आए हैं, उनमें ओपन मिली स्ट्रोक, गल्स, सिगल प्रमुख हैं. इनकी सुरक्षा को लेकर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. वनपाल से लेकर रेंजर तक मुस्तैद हैं. वन सुरक्षा समिति को भी एक्टिवेट किया गया है.

हत्या पर कड़ी सजा

डीएफओ बताते हैं कि कुछ लोगों के अंदर इन पक्षियों को लेकर कई तरह के गलत भाव है. कुछ लोग समझते हैं कि इन पक्षियों को खाने से गर्माहट आती है तो कुछ लोग अलग-अलग कारण बताते हैं. लेकिन ऐसा नहीं हैं. खंडोली का इलाका इन पक्षियों का पसंदीदा रहा है. ऐसे में हर वर्ष ये पक्षी यहां आते हैं. ऐसे पक्षियों की हत्या करने के उद्देश्य से कुछ लोग जाल लगाते हैं तो कुछ लोग जहरीला पदार्थ खिला देते हैं. ऐसे में आम लोगों को जागरूक किया जा रहा है.

लोगों को बताया गया है कि इन मेहमान पक्षियों की हत्या करना दंडनीय अपराध है. इस अपराध में सात वर्ष तक की सजा तक का प्रावधान है. वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत यह कार्रवाई की जाती है.

सेंट्रल एशियन फ्लाइवे से आते हैं पक्षी

मनीष तिवारी बताते हैं कि चूंकि नवंबर से साइबेरिया क्षेत्र का पारा निरंतर गिरता रहता है. पारा माइनस हो जाता है, ऐसे में इन पक्षियों द्वारा गर्म इलाके की तलाश शुरू कर दी जाती है. हिमालय से आगे बढ़ते ही इन पक्षियों को गर्म प्रदेश मिलने लगता है. ऐसे में ये लोग भारत के अलग-अलग हिस्से में प्रवास करते हैं. जिस राह को ये पक्षी चुनते हैं, उसे सेन्ट्रल एशियन फ्लाइवे कहा जाता है. इसी सेन्ट्रल एशियन फ्लाइवे के रिजर्व क्षेत्र को ये पक्षी चुनते हैं. उस सुरक्षित इलाके को चुना जाता है जहां पानी का ठहराव अधिक होता है.

उधवा के साथ खंडोली इनका पसंदीदा इलाका

डीएफओ बताते हैं इन पक्षियों के पसंदीदा इलाके में उधवा का सुरक्षित इलाका है. जहां गंगा 14-15 किमी चौड़ी है. बहुत सारे पक्षी वहीं रुक जाते हैं. बहुत सारे पक्षी आगे बढ़ते हैं तो गिरिडीह के खंडोली या दुमका के मसानजोर पहुंचते हैं. चूंकि मसानजोर में गहराई ज्यादा है तो बहुत सारे पक्षी इस क्षेत्र को पसंद नहीं करते हैं. वहीं खंडोली में गहराई ज्यादा नहीं है और फैलाव ठीक ठाक है. ऐसे में विदेशी पक्षी इस क्षेत्र को पसंद करते रहे हैं. डीएफओ बताते हैं कि इन पक्षियों की स्मरण क्षमता बहुत अधिक होती है. ऐसे में एक बार जिस क्षेत्र को ये पक्षी चुनते हैं, बार-बार वहीं आते हैं.

प्रजनन क्षेत्र तैयार करने की योजना

रही बात प्रजनन की तो अभी इस क्षेत्र में पक्षी प्रजनन नहीं कर रहे हैं. चूंकि इस क्षेत्र में पक्षी 3-4 माह ही रहते हैं. ऐसे में ज्यादातर प्रजनन का क्षेत्र साइबेरिया का इलाका ही रहता है. हालांकि हाल के वर्ष में कई बार यह बात सामने आयी है कि कुछेक प्रवासी पक्षी उधवा (गंगा तट) में प्रजनन किए हैं. भविष्य में पक्षी गिरिडीह के खंडोली में प्रजनन करें, इसकी संभावना को तलाशा जा रहा है. खंडोली जल्द ही बायो हेरिटेज साइट घोषित हो रहा है. ऐसे में यहां विकास के कई कार्य होने हैं. यहां इस बात पर भी रिसर्च होगा कि विदेशी पक्षी का ठहराव कैसे हो, उन्हें इस क्षेत्र कि आदद कैसे लगे. जब पक्षियों को आदत लगेगी तो यहां भी प्रजनन करने की संभावना बढ़ेगी.

क्या हैं सेंट्रल एशियन फ्लाईवे

यह विशाल पक्षी मार्ग है जो आर्कटिक और हिंद महासागर के बीच यूरेशिया से होकर गुजरता है. इस मार्ग में तीस से अधिक देश शामिल हैं. यह मार्ग 182 प्रजातियों की 279 से अधिक प्रवासी पक्षियों का है. इसी मार्ग से होते हुए पक्षियां हिमालय को क्रॉस करते हुए भारत के विभिन्न राज्यों तक पहुंचती है. इस मार्ग के अंदर भारत के साथ तीस देश आते हैं.

खंडोली पर विशेष ध्यान

यहां बता दें कि खंडोली जलशय को और अधिक सुंदर बनाने का काम किया जा रहा है. पिछले दिनों मंत्री सुदिव्य कुमार ने भी इसे लेकर दिशा निर्देश दिया था. इसके बाद नक्शा भी तैयार किया गया कि किस तरह से यहां विकास के कार्य होंगे. किस स्थान और वाच टावर बनाया जाएगा, जहां से लोग प्रवासी पक्षियों को देख सकेंगे.