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महात्मा गांधी का नाम हटाने का फायदा क्याः प्रियंका गांधी

मनरेगा का नाम बदलने पर भी वॉयनॉड सांसद से प्रश्न किया

  • गांधी का नाम हटाने का मकसद बताएं

  • अतिरिक्त खर्च की जिम्मेदारी किसकी

  • गरीबों को रोजगार देना या कुछ और

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने केंद्र सरकार की उस प्रस्तावित योजना पर गंभीर सवाल उठाए हैं जिसके तहत महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को निरस्त करके एक नया कानून लाया जा रहा है। उन्होंने विशेष रूप से पूछा है कि इस महत्वाकांक्षी ग्रामीण रोज़गार योजना से महात्मा गांधी का नाम क्यों हटाया जा रहा है और सरकार का असली मकसद क्या है।

केरल के वायनाड से लोकसभा सांसद प्रियंका गांधी ने संसद परिसर में संवाददाताओं से बातचीत करते हुए, संसद में चल रहे लगातार गतिरोध के लिए भी सरकार को ही ज़िम्मेदार ठहराया। उन्होंने सीधे तौर पर दावा किया कि ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार स्वयं ही सदन नहीं चलाना चाहती है। उन्होंने बताया कि विपक्षी दल प्रदूषण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की मांग कर रहे थे, लेकिन सरकार की ओर से उस पर भी कोई ध्यान नहीं दिया गया।

प्रियंका गांधी ने नाम बदलने की प्रक्रिया से जुड़ी लागत पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि जब किसी स्थापित योजना का नाम बदला जाता है, तो उसमें भारी प्रशासनिक और प्रचार खर्च आता है, जो अंततः सरकारी खजाने पर बोझ डालता है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि महात्मा गांधी का नाम हटाना सिर्फ एक नाम परिवर्तन नहीं है, बल्कि इसके पीछे क्या राजनीतिक या वैचारिक उद्देश्य हैं, यह स्पष्ट होना चाहिए।

केंद्र सरकार विकसित भारत-रोज़गार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) (विकसित भारत- जी राम जी) विधेयक, 2025 नामक एक नया विधेयक लोकसभा में लाने की तैयारी कर रही है। इस नए विधेयक का उद्देश्य मनरेगा की जगह लेना है। विधेयक की प्रतियाँ लोकसभा सदस्यों को वितरित की जा चुकी हैं। प्रियंका गांधी और कांग्रेस पार्टी का मानना है कि यह कदम उस ऐतिहासिक विरासत और सामाजिक न्याय के प्रतीक को मिटाने का प्रयास है जो यह योजना देश को प्रदान करती है। उनके अनुसार, यह स्पष्ट रूप से दिखाता है कि सरकार केवल योजनाओं का नाम बदलना चाहती है, न कि ग्रामीण गरीबों को रोज़गार की गारंटी देने के मूल उद्देश्य को मज़बूत करना चाहती है।