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विनय चौबे के खिलाफ आईएएस अमित का बयान

झारखंड शराब घोटाला में जांच की गाड़ी और आगे बढ़ी

  • विभाग में मौखिक आदेश पर होता था काम

  • बिना उनकी मर्जी के कोई फैसला नहीं होता

  • टेंडर और भुगतान का फैसला भी उनका था

राष्ट्रीय खबर

रांचीः झारखंड शराब घोटाला मामले में जाँच को एक महत्वपूर्ण मोड़ देते हुए, उत्पाद विभाग के तत्कालीन आयुक्त और वर्तमान में वाणिज्य कर विभाग में आयुक्त के पद पर कार्यरत आईएएस अमित कुमार का बयान धारा 164 के तहत मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज किया गया है। यह बयान, सोमवार को एसीबी कोर्ट की अनुमति के बाद रिकॉर्ड किया गया। यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि अमित कुमार ने स्वयं एजेंसी के कहने पर नहीं, बल्कि अपने निजी आग्रह पर कोर्ट से अपना बयान दर्ज करवाने का अनुरोध किया था। उनके आग्रह पर, कोर्ट ने एक मजिस्ट्रेट की नियुक्ति की, जिनके सामने अमित कुमार ने अपना बयान दर्ज कराया, जिसे अब सीलबंद कर दिया गया है।

अमित कुमार ने अपने बयान में शराब घोटाले से जुड़े कई अहम और चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। उन्होंने स्पष्ट रूप से विनय चौबे, जो उस समय उत्पाद विभाग के सचिव थे, और इस घोटाले में शामिल अन्य लोगों की भूमिका का विस्तृत विवरण दिया है।

अमित कुमार ने मजिस्ट्रेट को बताया है कि उत्पाद विभाग में कोई भी टेंडर विनय चौबे के मौखिक आदेश पर ही होता था, और यह निर्णय भी चौबे ही लेते थे कि टेंडर किसे आवंटित किया जाना है। टेंडर आवंटन के बाद प्लेसमेंट एजेंसियों को पैसों का भुगतान भी विनय चौबे के निर्देश पर ही किया जाता था। विभाग के सभी अधिकारियों को यह मौखिक आदेश दिया गया था कि टेंडर और भुगतान से संबंधित फ़ाइलों में केवल वही नोटिंग लिखी जाएगी जो विनय चौबे कहेंगे। इसका अर्थ है कि आधिकारिक दस्तावेज़ीकरण में नियमों की अनदेखी करते हुए चौबे की इच्छा को प्राथमिकता दी गई।

चौबे पर छत्तीसगढ़ के अधिकारी अरुणपति त्रिपाठी के साथ मिलकर सभी टेंडरों को इस तरह से मॉडिफाइड करने का भी आरोप है, जिससे प्लेसमेंट एजेंसियों को अधिकतम लाभ मिल सके। संक्षेप में, अमित कुमार के बयान के अनुसार, जब तक विनय चौबे उत्पाद विभाग में सचिव रहे, उन्होंने विभाग को सभी नियमों को दरकिनार करते हुए पूरी तरह से अपने हिसाब से चलाया। उनके कार्यकाल में उत्पाद विभाग में उनका ‘वन-मैन शो’ था, जहाँ नीचे से लेकर ऊपर तक के सभी अधिकारियों को उनके आदेशों का पालन करना पड़ता था, भले ही वे नियम विरुद्ध हों।

यह बयान जाँच एजेंसी के लिए एक महत्वपूर्ण प्रमाण के रूप में कार्य कर सकता है। इससे पहले, शराब घोटाला मामले में एसीबी ने आईएएस अमित कुमार से दो बार पूछताछ की थी। उन शुरुआती पूछताछ में भी उन्होंने विनय चौबे के उत्पाद विभाग के सचिव रहते हुए किए गए कथित घोटालों का खुलासा किया था। अब, मजिस्ट्रेट के सामने $164$ के तहत दर्ज इस बयान को कानूनी रूप से अधिक मज़बूत साक्ष्य माना जाता है, जिससे घोटाले की तह तक जाने और इसमें शामिल उच्चाधिकारियों पर कार्रवाई करने का मार्ग खुल सकता है।